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संसार में पांच प्रकार के दुख : रामवेश

एक वर्ष पहले
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महर्षि दयानंद योग चिकित्सा आश्रम में मासिक वैदिक सत्संग का आयोजन स्वामी रामवेश की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर पंडित रामेश्वर आर्य ने भी अपने विचार रखें। स्वामी रामवेश ने 5 क्लेशों की व्याख्या विस्तार से की।

उन्होंने बताया कि अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश ये पांच प्रकार के संसार में दुख होते हैं। अविद्या जो चीज जैसी है, उसको उससे विपरीत मानना और विद्या जो चीज जैसी है, उसको वैसा ही मानना। अविद्या सब क्लेशों की जड़ है। दूसरा क्लेश अस्मिता नाम का है अर्थात बुद्धि और आत्मा को एक मानना और अहंकार करना। तीसरा क्लेश राग है। सुख के बाद राग पैदा हो जाता है, जिसे मोह भी कहते हैं। चौथा क्लेश द्वेष है। प्रत्येक दुख के बाद द्वेष का संस्कार रह जाता है। जो बदले की भावना पैदा करता है। जिस आदमी ने किसी को दुख दिया हो 10 साल बाद भी वो सामने आ जाए तो बदले की भावना और द्वेष प्रकट हो जाता है। पांचवां क्लेश अभिनिवेश है। अर्थात मृत्यु का भय। मृत्यु का भय विद्वान आदमी को भी सताता है। केवल अष्टांग योग का पालन करने वाला योगी ही मौत के भय से छुटकारा पा सकता है। एक गंदी नाली में पड़ा हुआ कीड़ा यदि उसको लकड़ी से छुआ जाए तो डरकर भाग लेता है। इसलिए मौत का भय सभी प्राणियों को सताता है। केवल योग साधना ही अभिनिवेश से बचने का उपाय है। पंडित रामेश्वर आर्य ने भजनों के द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और महर्षि दयानंद की योग शक्ति के बारे में अपने विचार रखें। कार्यक्रम मा. जगदीशचंद्र आर्य, बलवान आर्य, महेन्द्र पाल आर्य, रणबीर आर्य, कैप्टन रामदत्त, रणबीर आर्य मौजूद रहे।

जींद. सत्संग को संबोधित करते स्वामी रामवेश।
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