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दुखों से मैत्री कर लो, जीवन आनंदमय बन जाएगा : अरूण मुनि
फतेहाबाद| ठाकर बस्ती स्थित जैन स्थानक में प्रवचन करते हुए योगराज युवा प्रेरक श्री अरूण मुनि जी ठाणे-4 ने कहा कि यह संसार रोग धर्मी है। आपके शरीर में कभी भी कोई भी रोग आ सकता है। लोग रोग को कोसते रहते हैं, रोग दु:खदाई है परंतु नहीं।
रोग हमें जगाने आता है। मोह निद्रा से जागो, रोग से भागो नहीं, रोग को देखकर जागो। रोग यही कहता है हम थोड़ा-थोड़ा देह का मोह त्यागे। अगर इंसान ने देह का मोह त्याग दिया तो आत्मा की तरफ ध्यान जाएगा। अगर आत्मा की तरफ ध्यान होगा तो विश्व का कोई भी रोग आपको पीडि़त नहीं कर सकता। जैन मुनि ने कहा कि जागो गफलत से जागो, रोग से मैत्री कर लो, दु:खों से मैत्री कर लो।