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नवरात्र 25 से, सजेंगे मां के दरबार
चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से शुरू होने जा रहे हैं। उसी दिन कलश स्थापना होगी और हिंदू नववर्ष शुरू होगा। इस बार नवरात्रि में एक विशेष संयोग बन रहा है। पंडित प्रवीण शास्त्री ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन की देवी शैलपुत्री, दूसरे दिन की ब्रह्मचारिणी, तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कूष्मांडा, पांचवी स्कंध माता, छठी कात्यायिनी, सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी व नौवीं सिद्धिदात्री। ये मां दुर्गा के नौ स्वरुप हैं। नवरात्रि में इनकी पूजा विशेष रूप से की जाएगी। नवरात्रि के बीच में ही गुरु अपनी राशि धनु से मकर में जाएगा। मकर गुरु की नीच राशि है। यानी नवरात्रि के मध्य में ही गुरु नीच का हो जाएगा। चैत्र नवरात्रि गुरुवार 2 अप्रैल तक रहेगी। इसको लेकर बहादुरगढ़ के दुर्गा मंदिर, सब्जी मंडी स्थित माता का मंदिर, सेक्टर-2 मंदिर, अग्रवाल काॅलोनी मंदिर, रेलवे रोड हनुमान मंदिर व शहर के सभी मंदिरों को सजाने की तैयारी शुरू हो गई है।
25 से शुरू होगा हिंदी नववर्ष
25 मार्च से हिंदी नववर्ष विक्रम संवत् 2077 शुरू होगा। इसका नाम प्रमादी है। नवरात्रि बुधवार से शुरू होंगे। अगले सप्ताह गुरुवार को खत्म होगी। प्रमादी संवत् के राजा बुध और मंत्री चंद्र होंगे। बुध व चंद्र आपस में शत्रु भाव रखते हैं। ऐसे में मंत्री और राजा के बीच मतभेद होने से प्रजा को कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।
शीतलाष्टमी व्रत कल, पूजा कर मां का आशीर्वाद लें
बहादुरगढ़ | होली के आठवें दिन बसौड़ा व्रत को ही शीतला अष्टमी व्रत कहा जाता है। यह व्रत माता शीतला को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष शीतला अष्टमी का व्रत चैत्र माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है। इस साल चैत्र माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 16 मार्च को है। इसलिए शीतला अष्टमी व्रत 16 मार्च को है। शीतला अष्टमी पर पूजा का मुहूर्त सुबह 6.46 से शाम 06.48 बजे तक है।
रोगों से रक्षा करता है शीतलाष्टमी
पंडित प्रवीन शास्त्री ने बताया िक स्कंद पुराण में माता शीतला का वर्णन है, जिसमें उन्हें चेचक जैसे रोगों की देवी बताया गया है। उनके स्वरूप का वर्णन करते बताया गया कि माता शीतला अपने हाथों में कलश, सूप, झाड़ू व नीम के पत्ते धारण किए हुए हैं। वे गर्दभ की सवारी किए हुए हैं। शीतला माता के साथ ज्वरासुर ज्वर का दैत्य, हैजे की देवी, चौंसठ रोग, घेंटुकर्ण त्वचा रोग के देवता एवं रक्तवती देवी विराजमान होती हैं। इनके कलश में दाल के दानों के रूप में विषाणु या शीतल स्वास्थ्यवर्धक व रोगाणुनाशक जल है। इस कारण इसे होली के अाठवें दिन मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को लोग जल्द सुबह उठकर सूर्योदय से पहले स्नान करेंगे। फिर शीतला माता का स्मरण करने के बाद व्रत शुरू होगा। शीतलाष्टक का पाठ होगा। सुबह छह बजे से पूजा का सिलसिला शुरू होगा।
178 साल पहले बना था ऐसा ही दुर्लभ संयोग
पंडित शास्त्री के अनुसार 11 अप्रैल 1842 से चैत्र माह की नवरात्रि शुरुआत हुई थी। इसमें 16 अप्रैल को गुरु ग्रह ने धनु से मकर राशि में प्रवेश किया था। इस साल 2020 में भी ऐसा ही संयोग बन रहा है। 25 मार्च से नवरात्रि शुरू होंगे, जबकि 29 मार्च को गुरु राशि बदलकर मकर राशि में जाएगा। मकर राशि में मंगल, गुरु और शनि का योग बनेगा। इस दौरान जगह-जगह मातारानी के भव्य दरबार सजेंगे। जहां नौ दिन तक धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।