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ओलावृष्टि-बारिश से गेहूं व सरसों की फसलें खराब, किसानों को 35 करोड़ रु. का नुकसान

एक वर्ष पहले
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मार्च के प्रथम सप्ताह में तेज बरसात व ओलावृष्टि किसानों को 35 करोड़ रुपए का फटका लगा गई। जींद, जुलाना, पिल्लूखेड़ा और सफीदों में बरसात व ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। खेतों में अब भी पानी भरा है।

कृषि विशेषज्ञों की माने तो जिले में बरसात व ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल में औसत 18 से 25 प्रतिशत नुकसान है जबकि सरसों में 30 से 40 प्रतिशत नुकसान है। कई जगहों पर यह नुकसान 70 से 80 प्रतिशत भी है। खराब हुई फसल को लेकर किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की तरफ विशेष गिरदावरी के कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। कृषि विभाग कार्यालय में भी केवल बीमित किसानों के ही फॉर्म जमा किए जा रहे हैं। जिले में 2 लाख 15 हजार हेक्टेयर यानी 537500 एकड़ गेहूं का रकबा है जबकि सरसों की लगभग 5 हजार हेक्टेयर में बिजाई की गई है। औसतन जिले में 21 क्विंटल प्रति एकड़ गेहूं का उत्पादन होता है यानी हर साल लगभग 1128750 टन गेहूं का उत्पादन होता है। इस बार भी लगभग 12 लाख टन उत्पादन होने की उम्मीद थी, लेकिन मार्च के पहले व दूसरे सप्ताह में हुई तेज बरसात व ओलावृष्टि के कारण जिले में गेहूं की फसल को औसत 18 से 25 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है।

सिर्फ बीमित किसानों के लिए जा रहे फार्म

एक तरफ किसान फसल खराब होने पर मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन कृषि विभाग द्वारा केवल बीमित किसानों के ही फार्म कार्यालय में जमा किए जा रहे हैं। शुक्रवार को फार्म जमा करवाने के लिए कृषि विभाग कार्यालय में किसानों की लंबी-लंबी लाइनें लगी नजर आई। इस दौरान फार्म भी खत्म हो गए तो किसान खुद फोटोस्टेट की दुकान पर फार्मों की फोटोस्टेट करवाते दिखे।


ये कहते हैं एक्सपर्ट : उत्पादन पर पड़ेगा असर


बरसात व ओले के कारण सरसों व गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। जहां ओला सरसों की फसल पर पड़ा है, वहां 30 से 40 प्रतिशत नुकसान है। कुछ जगह 70 से 80 प्रतिशत भी है। गेहूं में ओले के कारण 18 से 25 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है। पानी के कारण 10 प्रतिशत ज्यादा नुकसान है। असली आंकलन 10 दिन ही लग सकेगा। ओले के कारण सरसों का पौधा सफेद हो जाएगा और दाना खाली हो जाएगा। इसी प्रकार गेहूं में दाना नहीं बनेगा। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। डॉ. यशपाल मलिक, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, पांडु पिंडारा।

ऐसे समझिए नुकसान


कृषि विशेषज्ञ की माने तो जिले में गेहूं की फसल में औसत 18 से 25 प्रतिशत नुकसान है। जिले में गेहूं का कुल रबका 537500 एकड़ है। ऐसे में 18 प्रतिशत नुकसान भी माने तो लगभग 203175 टन कम उत्पादन होगा। इस समय सरकारी रेट लगभग 1750 रुपए प्रति क्विंटल है, जो लगभग 35 करोड़ रुपए बनता है।


गेहूं में 18 से 25 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ : कृषि वैज्ञानिक

समस्या : जिले में 2 लाख 15 हजार हेक्टेयर गेहूं का रकबा, सरसों की 5 हजार हेक्टेयर में बिजाई

अब आगे क्या : सरकार की तरफ से जींद जिले के लिए खराब हुई फसलों के नुकसान की गिरदावरी के लिए अब तक आदेश जारी नहीं किए हैं। ऐसे में जिले में जहां ज्यादा नुकसान है, वहां बिना गिरदावरी कैसे किसानों को मुआवजा मिलेगा?

जींद. जुलाना के गांवों में खेतों में भरा बरसाती पानी।

जींद. कृषि विभाग कार्यालय में फार्म जमा करवाने पहुंचे किसान।
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