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गुरु का वचन सुनने से रूह का मैल भी धुलता रहता है : कंवर

एक वर्ष पहले
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जिस प्रकार कपड़े को जल्दी जल्दी धोने से वो मैला नहीं होता। उसकी चमक बनी रहती है वैसे ही बार बार सत्संग में आने से व गुरु का वचन सुनने से जीवों की रूह का मैल भी धुलता रहता है। संगत यदि बुरों का करते हो तो बुरी आदत आती है वहीं यदि संगत यदि महापुरषों का हो तो मनुष्य अपना कल्याण करवा लेता है। यह सत्संग वचन कंवर साहेब महाराज ने जींद में यूनिवर्सिटी के सामने स्थित राधास्वामी आश्रम में दिए।

गुरु महाराज जी ने कहा कि जो संताे की बात को समझ जाते हैं और उनको अपना लेते हैं उनका जीवन में सुधार आसानी से सम्भव है। लेकिन यदि लोहा ही खोटा है तो पारस बेचारा क्या कर सकता है। मनुष्य तो सभी एक समान ही पैदा होते हैं, लेकिन उसकी संगति उसके अंदर दुर्गन या अच्छे गुणों को भरती है। यही दुर्गन संतों की शरणाई से दूर हो जाते हैं लेकिन केवल उनके जो अपने अंदर सुधार लाना चाहते हैं। यदि आप अपने अंदर सुधार लाना ही नहीं चाहते तो फिर संत सतगुरु क्या कर लेगा। पूर्ण समर्पण से यदि सतगुरु की शरणाई में गए तो वो पारस पत्थर से भी बढ़कर हैं, क्योंकि पारस तो लोहे को सोने में ही बदल सकता है लेकिन संत सतगुरु तो अपने संग में आए जीव को हूबहू अपने समान कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि संत के दर्शन के अनगिनत फल मिलते हैं। उन्होंने कहा कि जो गुण आत्मा में है वहीं परमात्मा में हैं लेकिन काल का पसारा इतना है कि हम इसे समझ नहीं पाते हैं। जिसके सतगुरु सर पर हैं वो इस बात को समझना शुरू कर देगा। हर पल परमात्मा की रजा में रहो। परमात्मा सबकी भलाई चाहता है। उन्होंने कहा कि आपको दिखा भी दिया। कल से लगातार बारिश हो रही थी लेकिन सत्संग के लिए परमात्मा ने आपकी पुकार सुनी और बारिश में राहत हुई। उन्होंने कहा कि यदि आप अच्छे हो, सच्चे मन से कार्य करना चाहते हो तो प्रकृति आपका साथ देती है।

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