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हाईकोर्ट ने डिस्टेंस के एग्जाम समय पर करवाने को लेकर सीडीएलयू रजिस्ट्रार को दिए आदेश

एक वर्ष पहले
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चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ता सुनील नेहरा के माध्यम से एक याचिका दायर कर मांग की है कि डिस्टेंस मोड से करवाए जाने वाले एग्जाम समय पर करवाए जाएं, ताकि विद्यार्थियों का एक साल बर्बाद न हो। क्योंकि सीडीएलयू हमेशा से ही डिस्टेंस के एग्जाम लेट करवाती है, जिससे छात्रों का रिजल्ट भी लेट आता है और उनका एक साल भी बर्बाद हो जाता है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सीडीएलयू रजिस्ट्रार को यह निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में रजिस्ट्रार एक सकारण आदेश पारित करेगा और याची की शिकायत का 15 दिन में निवारण करेगा। इस संबंध में रिट की कॉपी संबंधित कार्यालय में दे दी गई है। अगर एग्जाम समय पर होंगे तो इससे हजारों छात्रों को लाभ होगा और उनका साल बर्बाद होने से बच जाएगा। सीडीएलयू द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (मुक्त और दूरस्थ माध्यमों से शिक्षा प्राप्ति) विनियम 2017 की घोर अवहेलना की जा रही है, जिसके चलते याची को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। नियम-7 के तहत कम से कम कुल सचिव के पदाधिकारी एक घोषणा पत्र को वेबसाइट पर प्रदर्शित करेगा, जिसमें यह अनुप्रमाणित किया गया हो कि संस्थान की वेबसाइट पर विनियम 7 में वर्णित दस्तावेजों को अपलोड किया गया है। जोकि सीडीएलयू द्वारा नहीं किया गया है। जिसकी वजह से छात्रों को पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है और वे कार्यालयों के चक्कर लगाते रहते हैं। इस संंबंध में अधिवक्ता सुनील नेहरा ने बताया कि रजिस्ट्रार द्वारा यूजीसी द्वारा बनाए गए विनियमों की अवहेलना भारतीय दंड संहिता की धारा 166 के तहत एक दंडनीय अपराध है, जिसमें एक वर्ष तक सजा हो सकती है।

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