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मंधार गांव में 46 साल से नहीं खेलते होली, होते हैं भजन कीर्तन
क्षेत्र के कट्टर आर्य समाजी गांव मंधार के लोग 46 वर्षों से होली नहीं मनाते। 1974 में तत्कालीन आर्य समाज के प्रधान व पूर्व राज्यमंत्री कर्णदेव कांबोज के पिता श्रद्धानंद कांबोज व अन्य ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से यह निर्णय लिया था कि गांव में होली पर आर्य समाज का दो दिवसीय अधिवेशन बुलाया जाए।
तब से गांव के होली का त्योहार मनाने की बजाय गांव के लोग होली के दिन सुबह से रात तक आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सत्संग, भजन व हवन करते हैं। आर्य समाज मंधार के प्रधान यशपाल आर्य, विद्याभूषण, मानसिंह आर्य, कुलदीप आर्य, प्रेमपाल, लज्जाराम व सत्यदेव आर्य आदि ने बताया कि उनका पूरा गांव सैकड़ाें वर्षों से आर्य समाज का अनुयायी है। हवनयज्ञ, सत्संग, प्रचार व धार्मिक गीतों से लोगों में ज्ञान बांटा जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि पूरे गांव के लोग होली से एक दिन पहले गांव के घर-घर में जाकर कार्यक्रम का न्याेता देते हैं जिसके बाद होली पर सुबह हवन यज्ञ होता है, जिसमें पूरा गांव शामिल होता है। उसके बाद सत्संग चलता है। देर रात तक कार्यक्रम चलता रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर होली के त्याेहार पर आसपास के गांव में हुल्लड़बाजी होती है। एक-दूसरे को रंग लगाने के नाम पर झगड़े होते हैं लेकिन यहां कोई झगड़ा नहीं होता।
आंख और स्किन का रखें ध्यान, होली पर रंग में न पड़े भंग रहेगी पुलिस गश्त
यमुनानगर | होली खेलते समय आंख के अंदर रंग गुलाल जाने का सबसे अधिक खतरा रहता है। आंखों में रंग जाने से जल होता और इसके अलावा केमिकल के कारण रोशनी तक जा सकती है होली के रंग में भंग न पड़े, इसके लिए पुलिस गश्त रहेगी। बुलेट से पटाखे बजाने वालों पर विशेष नजर रखी जाएगी। सिविल में इमरजेंसी ड्यूटी रहेगी। चिकित्सक तैनात होंगे। सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया का कहना है कि सूखे रंग से होली खेलने से परहेज करें। रंगों में मेटल आक्साइड मिला होता है जो बालों को नुकसान पहुंचाता है। खेलने से पहले चेहरे पर नारियल का तेल, शरीर पर सरसों का तेल लगाएं।
{1974 में तत्कालीन आर्य समाज प्रधान श्रद्धानंद कांबोज व ग्रामीणों ने लिया था होली न मनाने का निर्णय