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होली बाहरी नहीं व्यक्ति के भीतरी रंगों का त्योहार : स्वामी आलोक

एक वर्ष पहले
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अग्रवाल धर्मशाला में आनंदम मैत्रीसंघ द्वारा होली महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में स्वामी आलोक ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि होली का त्योहार विभिन्न रंगों का प्रतीक है परंतु हमें रंगों एवं गुलाल का प्रयोग नहीं करते हुए भीतर के रंगों को ध्यान के माध्यम से जान पाए तो असली होली भीतर के रंगों की होली है। होली का त्यौहार अपने अंदर के विभिन्न रंगों का प्रतीक है और ध्यान उनके मिलने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि होली का अर्थ है हो+ली। मतलब जो बात हो गई उसे भूल जाएं। उन्होंने ने हरिवंश राय बच्चन की कविता जो बीत गई सो बात गई की लाइनों को दोहराते हुए कहा कि इस त्यौहार पर सभी को क्षमा कर दें और क्षमा मांग लें।

जीवन नदी की तरह है, बस आगे बढ़ते जाएं। गलतियां सबसे होती हैं पर सूझवान व्यक्ति वहीं हैं जो गलती को दोहराए
नहीं। आनंदम मैत्रीसंघ के प्रवक्ता ने सुरेश मंगला ने बताया कि 14 से 17 मार्च तक अग्रवाल धर्मशाला में ओंकार साधना शिविर का आयोजन
किया जाएगा।

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