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जल गई होलिका, भक्ति की शक्ति से बचे प्रह्लाद
होली से पूर्व संध्या पर परंपरानुसार होलिका दहन किया गया। इसमें मान्यताओं के अनुसार होलिका जल गई और भक्ति की शक्ति से भक्त प्रह्लाद बच गए। जिलेभर में लोगों ने भगवान विष्णु और प्रह्लाद भक्त के जयकारों के बीच होलिका का दहन कर बुराई के अंत का संकल्प लिया। पर्व खूब उमंग से मनाया गया तथा गाजे-बाजे और नाच गाकर भी होलिका दहन हुआ।
त्योहार की मान्यता
होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जल सकती। इसी के घमंड में चूर होलिका भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को जलाने के लिए अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाती है। अग्नि की लपटें घिरती रही, मगर प्रह्लाद वहां भी केवल भगवान के नाम का सुमिरन करते रहे। प्रभु की भक्ति की शक्ति ऐसी थी कि होलिका जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। होलिका दहन कर सोमवार को यह परंपरा शहर के हर हिस्से व गांवों में निभाई गई।
मोहल्ला वैद्यवाड़ा में पुरुषों व युवाओं ने होली की अग्नि में जौ की बालियां भूनकर अनाज से उनके भंडार भरे रहने तथा पारिवारिक समृद्धि की मंगल कामना की। दहन से पूर्व होली पूजन किया गया जिसमें सोमप्रकाश सोनी, गुरदयाल, पार्षद भारत भारद्वाज, दिनेश भारद्वाज व रमेशचंद गुप्ता सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए।
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दिनभर चला पूजा-अर्चना का दौर
दिन के समय महिलाओं ने परंपरानुसार होलिका की पूजा-अर्चना की तथा व्रत रखकर परिवार के कुशल मंगल की कामना की। पूजन के दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाते हुए होलिका के चारों और कच्चा सूत (नाल) लपेटकर तथा जौ, हल्दी, गुड़ जल आदि चढ़ाकर मन्नतें मांगी। लोगों ने होलिका पर बिड़कुलों की माला बनाकर भी चढ़ाई। परंपरानुसार लोगों ने जौ की बालियों को होलिका की अग्नि में भूना।
होली के पर्व पर शक्ति नगर कॉलोनी में होलिका पूजन करती महिलाएं।
नई अनाज मंडी में होलिका दहन में गेंहू की बालियां सेकते व्यापारी।
रात्रि 7:50
होली के पर्व पर गांव कुंड में होलिका पूजन करती महिलाएं।