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कैसे पकड़े जाएंगे अपराधी और नशा तस्कर, 16 थाने और 17 चौकी वाले जिले को गश्त के लिए मिली केवल चार बोलेरो
जिला पुलिस विभाग में गाड़ियों और जवानों का टोटा जहां अपराधियों के हौंसले बढा रहा है। वहीं पुलिस का मनोबल कम करता जा रहा है। ऐसे में सिरसा पुलिस को उम्मीद थी कि मुख्यालय की ओर से उन्हें 15 से 16 नई गाड़ियां जल्द ही मिल जाएगी। मगर गुरुवार को मुख्यालय की ओर से केवल चार बोलेरो गाड़ी दी गई है।
16 थाने और 17 पुलिस चौकी वाले जिला सिरसा में पहले से ही कंडम गाड़ियों के सहारे चल रही पुलिस के लिए यह केवल नाममात्र की सुविधा मानी जा रही है। जिन पीसीआर गाडिय़ों में पुलिस गश्त करती है वो सभी कंडम हालत में हैं। ये पीसीआर ऐसी स्थिति में नहीं कि किसी वाहन का तेज गति से पीछा कर सके। नशा तस्करी में अव्वल हो चुके सिरसा की जिला पुलिस को 20 गाड़ियों की जरूरत है।
गाड़ियों के अभाव में किसी भी थाना क्षेत्र में पुलिस गश्त नहीं बढ़ा सकती। अगर कोई वारदात हो जाती है तो पुलिस को मौके पर पहुंचने में देर हो जाती है, देरी का कारण ये रहता है कि थाना प्रभारी अगर गाड़ी में गश्त पर या किसी मामले की जांच करने निकला हुआ है तो पीछे से थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों के पास गाड़ी उपलब्ध नहीं होती। जिला के प्रत्येक पुलिस थाना क्षेत्र में दर्जनों गांव आते हैं। एक गाड़ी के भरोसे पूरे इलाके में गश्त करना मुश्किल है। इसका सीधा फायदा चोरों और तस्करों को होता है, जिससे जिला में चोरी की घटनाएं व तस्करी पर लगाम हीं लग पा रही। प्रदेश पुलिस विभाग की ओर से सिरसा पुलिस को भेजी गई चार गाड़ियां किस थाने या सैल को दी जाएंगी इसका फैसला डीआईजी डॉ. अरुण नेहरा करेंगे। जिला पुलिस के हालात ऐसे हैं कि उसे डीसी ऑफिस से गाडिय़ां उधार मांगनी पड़ रही है। गाड़ी के अभाव में महिला पुलिस शहर में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गश्त नहीं कर पा रही।
एक-एक गाड़ी के आसरे चल रहे हैं पुलिस थाने
जिला पुलिस के पास करीब 90 वाहन हैं, जिनमें से 40 वाहन कंडम घोषित हो चुके हैं। कंडम वाहनों के समान नए वाहन भेजे जाने की जरूरत है। दरअसल, विभाग के पास गाडिय़ों का टोटा लंबे समय से है। ज्यादातर थाने सिर्फ एक एक गाड़ी से काम चला रहे हैं।
चौकियों में तैनात कर्मचारियों को सिर्फ बाइक से ही काम चलाना पड़ता है। कायदे से हर पुलिस थाने में एसएचओ की गाड़ी के अलावा एक पीसीआर जरूरी है। लेकिन कई थाने ऐसे हैं, जिनमें सिर्फ थाना प्रभारी के पास एक गाड़ी है।