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मानव मन की इच्छाएं आकाश के समान हैं अनंत: शीतल महाराज
अनाजमंडी रोड स्थित जैन स्थानक में शनिवार को जैन महासाध्वी शीतल महाराज ने प्रवचन किए। महासाध्वी शीतल महाराज ने कहा कि मानव मन की इच्छाएं आकाश के समान अनंत हैं, जिनका कोई छोर नहीं है तथा इच्छाओं में बहकर मानव संयम की सारी सीमाएं तोड़कर अपनी इच्छापूर्ति के लिए दिन-रात एक कर देता है तथा यही लोभ मानव का सबसे बड़ा अवगुण है। उन्होंने कहा कि लोभ से हानि होती है। ज्यों-ज्यों लाभ होता है त्यों-त्यों लोभ भी बढ़ता जाता है। उन्होंने कहा कि परिग्रह की भावना अच्छे-खासे इंसान को शैतान व हैवान बना देती है।
साध्वी ने कहा कि संसार में सरसों के दाने के समान सुख और पहाड़ के बराबर दुख है। उन्होंने कहा कि संसार रूपी वृक्ष पर लटका मानव मधुमक्खी का डंक सहने को तैयार है लेकिन वृक्ष छोडऩे को नहीं। उन्होंने कहा कि मानव जीवन तो अनमोल हीरा है, इसे चंद चांदी के टुकड़ों के मोह में फंसकर बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म तो उस नाव के समान है जो हमें संसार रूपी भवसागर से पार लंघाती है।