व्यसनों में पड़कर मनुष्य संचित धन को नष्ट कर देता हैं : सुरेश भारद्वाज

Kaithal News - श्री सनातन धर्म मंदिर में चल रहे श्री गायत्री महायज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में राजेंद्र बंसल ने अपनी प|ी सहित भाग...

Jan 16, 2020, 08:30 AM IST
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श्री सनातन धर्म मंदिर में चल रहे श्री गायत्री महायज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में राजेंद्र बंसल ने अपनी प|ी सहित भाग लिया व हवन में आहुतियां डाली। आचार्य पंडित सुरेश भारद्वाज ने माघ महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि प्राचीन काल में कुंडल व विकुण्डल नाम के दो भाई थे जिन्होंने व्यसनों में पड़कर के अपने पिता द्वारा संचित धन को व्यसनों में ही नष्ट कर दिया और दोनों की व्यसनों के कारण हालात बद से बदतर हो गई। अंत समय में एक की शेर के खाने से और दूसरे की सर्प के डसने से एक ही दिन में मृत्यु हो गई।

उनके पुण्य और पाप कर्मों के प्रभाव से एक स्वर्ग में गया और दूसरा नर्क में चला गया। जब उन दोनों भाइयों में से एक के स्वर्ग और दूसरे के नर्क में जाने का कारण देवदूत से पूछा गया तो देवदूत ने बताया कि इन दोनों भाइयों में से एक भाई ने माघ महीने में अनजाने में माघ महात्म्य का सत्संग किया और स्नान किया। उसके प्रभाव से ही उसको स्वर्ग लोक प्राप्त हुआ और स्वर्ग लोक में जाने वाले भाई ने जब देवदूत से पूछा कि मैं अपने भाई को नर्क में से कैसे निकाल सकता हूं, तब देवदूत ने कहा कि आप उन्हें अपने आठवें जन्म पूर्व का जो पुण्य कर्म है, उन्हें दे दें तो वह नरक में से निकल जाएगा। इस प्रकार उसने अपने आठवें जन्म का पुण्य कर्म उसको दे करके नर्क से निकाला और माघ महात्म्य स्नान के प्रभाव से दोनों भाई स्वर्ग में गए और उनको मोक्ष की प्राप्ति हुई। श्रद्धालुओं ने कहानी के जरिए ज्ञान देने पर आचार्य का आभार व्यक्त किया।

पूंडरी | हवन में आहुति डालते हुए श्रदालु।

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