पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Jhajjar News Haryana News Hundreds Of Acres Of Crop Wasted Due To Rain 500 Farmers Sought Compensation For Bad Crops

बारिश से सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद, 500 किसानों ने खराब फसल पर मांगा मुआवजा

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

पिछले दिनों जिले के अलग-अलग ब्लॉकों में हुई बारिश से फसलों के खराब होने की शिकायत है। अब बड़ी संख्या में किसान जिले के किसान सदन पहुंच रहे हैं और फसल बीमे के लिए आवेदन कर रहे हैं। इस बीच मौसम की बेरुखी से खतरा टला नहीं है। बादल छाए रहने से बूंदाबांदी के आसार बने। बुधवार व गुरुवार की रात बारिश की संभावना है। पिछले 1 सप्ताह से बूंदाबांदी के साथ कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई है। इसका असर फसलों पर पड़ा है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में जो क्षेत्र लो लाइन एरिया में थे और जहां पर जलभराव की समस्या बारिश का सीजन निकल जाने के बाद भी देखने को मिलती है। बुधवार को मौसम साफ हुआ है तब किसानों ने अपनी बर्बाद फसल के लिए मुआवजे की मांग की है। इसके लिए किसान झज्जर के किसान सदन पहुंचकर अपने आवेदन कर रहे हैं ताकि उनको प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत उनकी फसल के खराब का उचित मुआवजा मिल सके। मातनहेल के किसान सतबीर, जयकिशन व रामभज का कहना है कि पिछले दिनों हुई बारिश के साथ ओले आने की शिकायत रही हैं। इससे फसलों पर विपरीत असर पड़ा है। कई क्षेत्रों में सरसों व गेहूं की फसल एकदम तहस-नहस हो गई है। इसके खराब होने से अधिक नुकसान झेलना पड़ेगा। कुछ जगह तो फसलें बिछ गई है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र का किसान सरसों व गेहूं की फसल पर निर्भर रहता है क्योंकि यही दो रबी की ऐसी फसलें हैं जिसकी पैदावार क्षेत्र का किसान लेता हैं। बारिश के दिनों में भी फसल लेने का मौका मिलता है लेकिन तब यह बारिश पर निर्भर रहता है। लेकिन इस बार पकने को तैयार खड़ी फसलों पर अधिक बारिश का असर रहा है। यदि तेज हवा व ओले न आए, तब बारिश का लाभ अधिक रहता।

बीमा कंपनियों को दी सूचना, किसानों की फसल का उचित मुआवजा दें



आगे क्या: मौसम विभाग के पूर्व अनुमान के मुताबिक अभी रात के समय ठंड बनी रहेगी। रात का पारा 15 डिग्री से नीचे रहने से गेहूं में फायदा है। लेकिन सप्ताह बाद दिन का पारा 30 पार हो जाने से कहीं अधिक गर्मी होगी और फसलों के पकने का सिलसिला तेज हो जाएगा। आगे बारिश की संभावना नहीं है।

एक लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसलें: क्षेत्र में करीब 32 हजार हेक्टेयर में सरसों की बिजाई है, वहीं एक लाख से अधिक हेक्टेयर में गेहूं लगा है। फसलें मार्च आखिर तक पकने लग जाती हैं, लेकिन इस बार बारिश व खराब मौसम के कारण इनकी कटाई में कुछ देर हो सकती है, यदि मौसम साफ नहीं होता है।

500 किसानों ने किया आवेदन: क्षेत्र में काफी किसानों की फसलें बर्बाद हुई है। अभी किसान खराबे के बारे में शिकायत करने आ रहे हैं। अभी तक 500 से अधिक किसान आवेदन कर चुके हैं। आगे बारिश या ओलावृष्टि होती है, तब ऐसे किसानों की शिकायत बढ़ेगी।

तेज हवाओं ने डाला असर: कृषि विभाग का कहना है कि इलाके में फसल बर्बादी का मंजर बारिश के बाद तेज हवाओं के चलने से हुआ है, हालांकि बारिश के बाद हवा के कारण गिरी हुई फसलों के मौसम साफ होने के साथ उठने की भी संभावना रहती है, लेकिन जिस प्रकार से किसानों की शिकायत आ रही है उससे रोहतक जिले के साथ लगते बेरी, साल्हावास व मातनहेल क्षेत्र के किसान अधिक प्रभावित हुए हैं। झज्जर व बादली क्षेत्र में अधिक नुकसान नहीं है। कुछ जगह फसलें गिरी है, तब वह उठ भी रही हैं।

जिले में बारिश से उन क्षेत्रों में असर रहा है, जहां पर पानी खड़ा रहने की शिकायत अधिक है। हालांकि क्षेत्र में ओलावृष्टि का असर इतना व्यापक नहीं रहा है। इसके बावजूद जिस प्रकार से किसान अपनी बर्बाद हुई फसलों की शिकायत करने के लिए पहुंच रहे हैं। उसके लिए बीमा कंपनियों को सूचना दी गई है। ताकि उन्हें उचित मुआवजा उपलब्ध करा सकें।
इंद्रसिंह, डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर झज्जर

बर्बाद हुई किसानों की फसलें।
खबरें और भी हैं...