मैं रहूं या ना रहूं, पर भारत जरूर रहना चाहिए...

Fatehabad News - भारत का धर्म, संस्कार ऐसे हैं, जो कहीं नहीं मिल सकते। आज हम लोग इस धर्म व संस्कार को भूलते जा रहे हैं। यदि एेसा ही...

Bhaskar News Network

Sep 16, 2019, 07:36 AM IST
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भारत का धर्म, संस्कार ऐसे हैं, जो कहीं नहीं मिल सकते। आज हम लोग इस धर्म व संस्कार को भूलते जा रहे हैं। यदि एेसा ही चलता रहा तो नुकसान उठाना पड़ेगा। हमारी कमजोरी व अपने धर्म-संस्कार के प्रति गंभीरता न होना कोई दूसरा फायदा उठा सकता है। इसलिए हमें अपने धर्म को लेकर गंभीर होना होगा। अपने धर्म की रक्षा करनी होगी। यह बात दीदी मां साध्वी ऋतंभरा ने कही। वे रविवार देर शाम अनाज मंडी में वात्सल्य वाणी समिति की ओर से पहले वात्सल्य वाणी कार्यक्रम में सत्संग कर रही थी। कार्यक्रम में सांसद सुनीता दुग्गल के अलावा पूर्व विधायक बलवान दाैलतपुरिया, भाजपा जिलाध्यक्ष वेद फुलां, डॉ. वीरेंद्र सिवाच, सिरसा से वीरभान मेहता आदि मौजूद रहे।

कार्यक्रम के आयोजक राजेंद्र चौधरी, सुभाष जग्गा ने अतिथियों का स्वागत किया। साध्वी ऋतंभरा ने हिंदू धर्म व संस्कारों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें अपने धर्म के प्रति इतनी आस्था होनी चाहिए कि कोई भी आंख न उठा सके। उन्होंने कहा कि हम लोग आज हिंदू धर्म की परंपराओं को छोड़ कर दूसरे देशों व धर्मों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हम अपने व अपने बच्चों के जन्मदिन पर केक काटते हैं। कभी सोचा है कि खुशी के दिन हम कुछ काटते हैं।

फतेहाबाद। वात्सल्य वाणी कार्यक्रम का शुभारंभ करती साध्वी ऋतंभरा।

फतेहाबाद। वात्सल्य वाणी सेवा समिति की ओर से आयोजित वात्सल्य वाणी कार्यक्रम में मौजूद लोग।

वात्सल्य वाणी कार्यक्रम के शुभारंभ पर कलश यात्रा निकालते श्रद्धालु।

वृद्धाश्रम में नहीं बच्चों के बीच रहने चाहिए बुजुर्ग

साध्वी ऋतंभरा ने कहा है कि आज कल वृद्धाश्रम का चलन चल पड़ा है। छोटी सी बात होती नहीं कि हम अपने माता-पिता, सास-ससुर को घर से बाहर जाने काे कह देते हैं। यह गलत परंपरा है। बुजुर्ग वृद्धाश्रम में नहीं बल्कि घर में बच्चों, पोते-पोतियों के बीच अच्छे रहते हैं। अपने बुजुर्गों का सम्मान करने वे अपने पास रखने से भगवान खुश होते हैं।

देश कुछ मांगता है: ऋतंभरा

साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि देश कुछ मांगता है। हमें देश का ऋण चुकाना है। हमेशा तैयार रहें। उन्होंने एक कविता के जरिए कहा कि मैं रहूं या न रहूं्, पर भारत जरूर रहना चाहिए। हमें अपने देश को बचाए रखना है तो अपने मन के अंदर सच्ची देश भावना जगाए रखनी होगी। उन्होंने एक कथन के जरिए पड़ोसी को देश को चेतावनी दी कि वह अपनी सीमा में रहना सीखे। वरना तुम्हारे देश का रावलपिंडी, लाहौर भारत देश का हिस्सा होगा।

आज भी होगा सत्संग

राजेंेद्र चौधरी ने बताया कि साध्वी ऋतंभरा सोमवार शाम को भी सत्संग करेंगी। इस दौरान कई लोगों ने समिति के ट्रस्ट बनकर आर्थिक सहयोग किया।

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