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तान्ने मारै मेरे जिगर मै, मुश्किल रहणा हो इस घर मै...

एक वर्ष पहले
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तान्ने मारै मेरे जिगर मै, मुश्किल रहणा हो इस घर मै। टिकण का काम ना रहा...। इस रागनी से फूलसिंह ने अपने भाई को अपना दर्द सुनाया गया। जब फूल सिंह शिकार खेल कर घर आता है और अपनी भाभी से पीने के लिए पानी मांगता है तो उसकी भाभी पानी देने के बजाय उस पर नोटंकी को ब्याह लाने का टोंट कसती है यानी की ताने मारती है। कुंडली में सूर्यकवि पंडित लख्मीचंद पाठशाला में चल रहे सांग महोत्सव के आखिरी दिन फूलसिंह नौटंकी का किस्सा सुनने के लिए दूर-दराज से भारी संख्या में लोग पहुंचे।

अपने दादा की परंपरा को रखा जीवंत : विष्णु दत्त सांगी ने भी अपने दादा की परंपरा को जीवंत रखा। दादा लख्मीचंद व उसने पिता तूलेराम केवल नौटंकी के सांग में ही महिलाओं के कपड़े पहनते थे। सांग महोत्सव के आखिरी दिन विष्णुदत्त ने भी साड़ी पहनकर मालन के भांजे की बह़ु का रूप धारण किया था। जो नौटंकी रानी के पास हार लेकर जाती है। विधायक मोहनलाल बड़ौली ने कहा कि पंडित लख्मीचंद हरियाणा के महान कवि हुए हैं। वे एक सांगी के साथ- साथ महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे। पंडित लख्मीचंद ने अंग्रेजों के हाथों सम्मान लेने से मना कर दिया था। कार्यक्रम मेंं पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक, नाहरी मंडल के प्रधान अशोक भारद्वाज, भाजपा नेता आजाद नेहरा, ब्लॉक समिति सदस्य वेदपाल शॉस्त्री, रामकरण जठेड़ी, आजाद खरेटा आदि मौजूद थे।

राई. कुंडली में सूर्य कवि पंडित लख्मीचंद पाठशाला में सांग करती विष्णुदत्त सांगी की मंडली।
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