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सत्संग में मानव जीवन के उत्थान का मौलिक चिंतन न हो तो श्रवण का लाभ नहीं होगा : दिव्यानंद

एक वर्ष पहले
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श्री सेवा समिति महावीर दल द्वारा नंदवानी नगर में पावन होली मिलन के उपलक्ष्य में श्री दिव्य गीता अमृत महोत्सव किया जा रहा है। जिसमें प्रवक्ता डाॅ. स्वामी दिव्यानंद महाराज भिक्षु द्वारा गीता ज्ञान का अमृत रसपान कराया जा रहा है।

कथा वाचक ने कहा कि किसी भी धर्म चर्चा करने व सुनने का लाभ तभी होगा, जब उस चर्चा में मानव जीवन के उत्थान का मौलिक चिंतन हो। केवल पुरानी बातों को पौराणिक मानकर सुन लेने से मन का रंजन या फिर तसल्ली तो हो जाती है। यूं श्री गीता जी की वाणी भी बहुत पुरानी है। श्री कृष्ण अर्जुन को कहते हैं कि यह पुरातन योग सर्वप्रथम मैने सूर्य को कहा था। किंतु यह आज भी उतना ही नूतन है, जितना तब था।

इसलिए इसे पुरातन नहीं सनातन योग कहते हैं। यह सत्य है कि यदि आज कोई व्यक्ति जीवन का उत्थान चाहता है तो उसे कुछ प्रश्नों के उत्तर चाहिए। जिसमें उसकी समस्याओं का समाधान मिल जाए। कथा में कृष्ण लाल मल्हौत्रा द्वारा ध्वजारोहण किया गया। मुख्यातिथि के रूप में मिलाप चंद कपूर ने ज्योति प्रज्ज्वलन किया। मौके पर प्रधान विनोद खुराना तथा अर्जुन देव भारती, ललित बतरा, हरीश चावला, हंसराज अरोड़ा तथा राजकुमार ग्रोवर आदि मौजूद रहे।

डॉ. दिव्यानंद

सोनीपत. महावीर दल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु
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