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मौजूदा दौर में बड़ी चुनौती देश की सांझी संस्कृति को बचाने व विरासत संजोने की

एक वर्ष पहले
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सामाजिक सद‌‌्भावना मंच ने किले वाली मस्जिद में सद‌‌्भावना संगम होली मिलन समारोह का आयोजन किया। इसमें शहर के दर्जनों गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के प्रवक्ता अमरनाथ पारचा ने की और संचालन संयोजक रामफल दहिया ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गान के साथ हुई।

लोगों को संबोधित करते हुए हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति के सचिव सोहनदास ने कहा कि मौजूदा दौर में प्रगतिशील ताकतों के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की साझी संस्कृति को बचाने और साझी विरासत को संजोने की है। हमारी संस्कृति कभी भी नफरत की नहीं रही है। देश के आजादी के आंदोलन में भी सैकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे। हिन्दू-मुस्लिम मिलकर देश के खातिर लड़ा है और बलिदान दिए हैं, लेकिन आज जिस तरीके से एक धर्म विशेष को कभी आतंकवाद से जोड़ दिया जाता है, कभी उन्हें अपनी देशभक्ति साबित करने के किए कहा जाता है। ये देश की एकता और अखंडता के लिए सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि इस देश के मुस्लिम ने 1947 में बंटवारे के समय मजहब और मुल्क में से मुल्क को चुना था और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को स्थापित किया था। मंच के संयोजक रामफल दहिया ने कहा कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब और सांझी संस्कृति की रक्षा के लिए हम प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारा देश दुनिया के खुशहाल 156 देशों की सूची में 140वें स्थान पर है। इसी कड़ी में हमने होली मिलन समारोह का आयोजन मस्जिद में किया और हमारी कोशिश है कि सभी धर्मों के लोग परस्पर सदभाव से रहे और किसी भी तरह की गंदी राजनीति का शिकार न हो।

उन्होंने कहा कि ये देश जितना हिंदुओं का है, उतना ही इस देश के मुस्लिम, सिख, ईसाई का है और उतना ही किसी भी धर्म को ना मानने वाले लोगों का है। मंगत राम शास्त्री ने कहा कि प्रकृति की रंग-बिरंगी एकता जो बहुत निराली है, हम सब रंगों को संजोकर रखने का काम करेंगे। हर व्यक्ति की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए समाज को प्रगति के पथ पर लेकर जाने का काम करेंगे। इस मौके पर शास्त्री जी ने वर्तमान परिदृश्य पर आधारित हरियाणवी गजल भी सुनाई। कार्यक्रम में संरक्षक डॉ. रणबीर मलिक, एडवोकेट सुशील रोहिल्ला, सरदार जोगेंद्र सिंह, नवाब अली, सुनील कंडेला, सागर सिंगल उपस्थित रहे।

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