कार्यशाला में शास्त्रीय संगीत में भावों के महत्व से शिक्षक रू-ब-रू हुए

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Dec 18, 2019, 08:06 AM IST
Kurukshetra News - haryana news in the workshop teachers became familiar with the importance of expressions in classical music
विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान एवं सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यशाला के 7वें दिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय संगीत विभाग से डॉ. अमरजीत कौर द्वारा शास्त्रीय संगीत में भाव की विभिन्न-ताओं पर देशभर से आए शिक्षकों को जानकारी दी गई। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने कार्यशाला में डॉ. अमरजीत कौर, डॉ. सुरेन्द्र मोहन मिश्र, डॉ. सुशील कुमार का परिचय कराया। उन्होंने कहा कि सीसीआरटी देशभर के विद्यालयों में सेवारत शिक्षकों, शिक्षिकाओं के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करता है, जहां नवाचार परंपराओं से मिलते हैं। कार्यशालाओं द्वारा छात्रों एवं शिक्षकों में यह विश्वास पैदा किया जाता है कि प्रत्येक में कला क्षमता मौजूद है। डॉ. अमरजीत कौर ने शास्त्रीय नृत्य में भाव की विभिन्नता की जानकारी दी। बताया कि आंगिक भाव में कत्थक एवं भरतनाट्यम में कैसे प्रदर्शन किया जाता है। सात्विक अभिनय मन के भाव को कैसे प्रदर्शित करता है, अहार्य अभिनय में वेशभूषा का उपयोग किया जाता है, रूप सज्जा का उपयोग नृत्य एवं भाव प्रदर्शन के लिए अलग-अलग किया जाता है, के बारे में प्रत्यक्ष नृत्य के माध्यम से समझाया। नृत्य की भाव भंगिमाओं में रस का प्रमुख योगदान रहता है। नौ प्रकार के रस के आधार पर शारीरिक प्रदर्शन होता है।

छत्तीसगढ़ के शिक्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देते हुए।

संस्कृत है भारत को जोड़ने वाली भाषा

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से डॉ. सुरेन्द्र मोहन मिश्र ने भविष्य के लिए अतीत का संरक्षण विषय पर कहा कि भारत को जोड़ने वाली भाषा संस्कृत है। सभी को जोड़ने वाली लिपि ब्राह्मी लिपि है। संस्कृत प्राकृत भाषा एवं संस्कार से ली गई भाषा है। तालपत्र, पत्थर, धातु पर कुरेदकर लिखना लिपि कहलाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय कला एवं संस्कृति को संरक्षण देने के लिए इंदिरा कला केंद्र की स्थापना की गई है। दक्षिण एशिया का प्रमुख सिरमौर भारत रहा है। भारत के प्रमुख ग्रंथों को विदेशी संग्रहालय में रखा है और वे इसका उपयोग कर रहे हैं। न्याय भाष्य को आधार मानकर न्याय व्यवस्था मजबूत कर रहा है।

दोपहर को सीखा गीत गायन : दोपहर के सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से सहायक प्राध्यापक ने विभिन्न भाषाओं में गीत गायन सिखाया। उन्होंने हिन्दी गीत हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं, भोजपुरी गीत बरसेला पनिया करवई रोपनिया, राजस्थानी गीत ओ कुण बीजे बाजरो ए बादरी आदि का अभ्यास कराया। प्रात:कालीन सत्र में खेमराज साहू के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के शिक्षकों गंगाशरण पासी, अनिता तिवारी, रीता गिरी, मोमिता चटर्जी, सत्येन्द्र योगी ने छत्तीसगढ़ के लोक गायन नृत्य की प्रस्तुति दी। जिसमें राज्यगान अरपा पैरी की धार, कर्मा, रदारिया, राउत नृत्य, सुआ एवं भोजली गायन एवं नृत्य प्रस्तुत किए। गंगाशरण पासी ने बेटी बचाओ पर एकल नाटिका प्रस्तुत की। खेमराज साहू ने छत्तीसगढ़ के चोला उत्सव में नदिया बैला तथा पोला का मॉडल प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सीसीआरटी से देवनारायण रजक, हरि सिंह भी उपस्थित रहे।

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