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जर्जर बिल्डिंग में बनाया आइसोलेशन वार्ड, अंदर दवाएं तो दूर बेड पर चादर तक नहीं, फ्लू क्लीनिक भी नहीं बना

एक वर्ष पहले
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कोरोना वायरस को प्रदेश सरकार ने महामारी घोषित कर दिया है। इससे निपटने के तरह-तरह के इंतजाम किए हैं। अस्पतालों के लिए स्पेशल गाइडलाइन तक जारी कर दी गई है। ताकि कोई भी व्यक्ति इसकी चपेट में न आए। इतना सब कुछ होने के बाद भी जिला स्वास्थ्य विभाग अभी तक कोरोना वायरस को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

जिले के सबसे बड़े सिविल अस्पताल के हालात ये हैं कि 50 साल पुरानी बिल्डिंग जो कि जर्जर हो चुकी है। जहां से काफी समय पहले ही अन्य वार्ड नई बिल्डिंग मेंं शिफ्ट कर दिए हैं। वहीं पर एक कमरे के दरवाजे जिस पर पहले से स्वाइन फ्लू का स्टीकर चिपका था उस पर कोरोना वायरस का आइसोलेशन वार्ड होने का स्टीकर चिपका कर इतिश्री कर दी गई है। जिस कमरे को आइसोलेशन वार्ड का दर्जा दिया गया है। उसमें कोई भी अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गई है। आइसोलेशन वार्ड के 6 बेड पर चादर तक नहीं बिछाई गई और न ही किसी प्रकार की कोई यहां दवा की व्यवस्था की गई। आइसोलेशन वार्ड के आसपास कोई अन्य मरीज या व्यक्ति न आ पाए। कोरोना वायरस से संबंधी जानकारी देने व अन्य मदद के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 9416139660 हेल्पलाइन नंबर जारी किया हुआ है।

सीधी बातडाॅ. जयभगवान जाटान, सिविल सर्जन

Q. कोरोना वायरस आइसोलेशन वार्ड जर्जर बिल्डिंग में क्यों बनाया गया।

A. इसको लेकर मैं सोमवार काे स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक करूंगा और इस पर विचार किया जाएगा।

Q. आइसोलेशन वार्ड में बेड पर चादर तक नहीं और न ही कोई दवा की व्यवस्था है, ऐसा क्यों।

A. आइसोलेशन वार्ड में क्या व्यवस्था है इसको लेकर सोमवार को रिव्यू किया जाएगा और जो भी जरूरी सुविधाएं हैं वे मुहैया करवाई जाएंगी।

भास्कर सरोकार: अफवाहों से बचें, एहतियात बरतें

दैनिक भास्कर की आमजन से अपील है कि काेराेना वायरस को लेकर तरह-तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। सिर्फ रहन-सहन और खानपान में एहतियात बरतें। प्रत्येक व्यक्ति सेहत को लेकर सजग रहे। बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश, सिरदर्द महसूस होता है तो घबराएं नहीं, चिकित्सक से चेकअप कराएं। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर न थूकें, हाथों को बार-बार धोएं, आंख-नाक को न छुएं। इसके अलावा भीड़ वाले स्थान पर जाने से बचें।

सिविल में संदिग्ध की जांच के लिए नहीं है अलग व्यवस्था

कोरोना वायरस का यदि कोई संदिग्ध मरीज आता है तो सिविल अस्पताल में उसके लिए जांच की कोई अलग से व्यवस्था नहीं की गई। ताकि संदिग्ध मरीज के आने पर अन्य मरीजों के संपर्क में नहीं आए। इसी तरह से अस्पताल में किसी व्यक्ति के आने-जाने पर कोई रोक-टोक नहीं है। कोई भी मरीज कहीं से भी अस्पताल में दाखिल हो सकता है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए जरूरी है कि गेट पर ही संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए फ्लू क्लीनिक बनाया जाए।

चीन से आए युवक का किया चेकअप

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार को खरमरामजी गांव में 1 मार्च को चीन से आए युवक संजीव का उसके घर जाकर चेकअप किया। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. पालेराम कटारिया ने बताया कि संजीव में किसी प्रकार का कोरोना वायरस से संबंधित लक्षण नहीं मिला। रविवार को भी टीम जाकर फिर से उसका चेकअप करेगी।

का दर्जा दिया गया है। उसमें कोई भी अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गई है। आइसोलेशन वार्ड के 6 बेड पर चादर तक नहीं बिछाई गई और न ही किसी प्रकार की कोई यहां दवा की व्यवस्था की गई। आइसोलेशन वार्ड के आसपास कोई अन्य मरीज या व्यक्ति न आ पाए। कोरोना वायरस से संबंधी जानकारी देने व अन्य मदद के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 9416139660 हेल्पलाइन नंबर जारी किया हुआ है।

जींद. सिविल अस्पताल में कोरोना वायरस के लिए बना आइसोलेशन वार्ड। इधर, आइसोलेशन वार्ड जिसके बेड पर चादर तक नहीं।
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