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महिला सुरक्षा सहित अन्य मांगों को लेकर जन संघर्ष मंच के सदस्यों ने निकाला रोष मार्च

एक वर्ष पहले
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जन संघर्ष मंच हरियाणा की ओर से महिलाओं पर बढ़ती यौन हिंसा, गैर बराबरी, सांप्रदायिकता सहित अन्य मुद्दों को लेकर मार्च निकाला गया। थानेसर रेलवे स्टेशन कुरुक्षेत्र से इकट्ठा होकर महिलाएं हाथों में सावित्री बाई फुले, फातिमा शेख, प्रीतिलता, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, समाजवादी नेत्री क्लारा जेटकिन, रोजा लग्जेम्बर्ग के चित्र लेकर केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए थानेसर शहर के बाजार से होते हुए पुराने बस स्टैंड पहुंच जनसभा की।

प्रदर्शन का नेतृत्व मंच की महासचिव सुदेश कुमारी व महिला नेता ऊषा कुमारी ने किया। सुदेश कुमारी ने कहा महिलाओं ने औद्योगिक क्रान्ति के बाद मजदूरी बढ़ाने, काम के घंटे कम करने के लिए संगठित होकर विरोध करते हुए अपनी ताकत का एहसास कराया था। महिलाओं ने 1908 में काम के घंटे कम करने के साथ-साथ सार्वजनिक मताधिकार की मांग को एक लेकर एक बड़ा मार्च निकाला था। डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में प्रसिद्ध जर्मन नेत्री क्लारा जैटकिन के प्रयासों से इस दिन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूग में मनाने का फैसला लिया गया था। सन् 1911 से हर साल सारी दुनिया में इस दिन को महिलाओं का समानता के लिए संघर्ष के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

छात्र संगठन एसओएसडी की संयोजिका कविता विद्रोही ने कहा देश भर में शाहीन बाग की महिलाओं का संघर्ष ऐतिहासिक है। जन संघर्ष मंच हरियाणा की जिला उपाध्यक्ष ऊषा कुमारी ने कहा हरियाणा सरकार लाखों मजदूर महिलाओं, आशा, आंगनबाड़ी वर्कर, मिड-डे मील वर्करों को मजदूर मानने को भी तैयार नहीं हैं।

केंद्र की भाजपा व राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं करती है पर बजट में महिलाओं के कल्याण के लिए कोई भी इंतजाम नहीं किया जाता। मनरेगाा, निर्माणकार्य मजदूर महिलाओं को मिलने वाली मामूली सुविधाओं से भी वंचित कर दिया है। घरेलू हिंसा की शिकार, विधवा, दलित व तलाकशुदा महिलाओं के लिए भी कोई रोजगार व आवास का भी प्रबंध नहीं है, जिससे महिलाओं का भारी शोषण हो रहा है।

ऊपर से सरकार ने नई शराब नीति के तहत घर-घर में शराब रखने की छूट का लाईसेंस एक हजार रुपए में देने की नीति बनाकर तमाम शराब के खुर्दों को कानूनी रूप दे दिया है। रात के तीन बजे तक शराब के बार खुलने, शराब को सस्ती करने, शराब के ठेकों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं के लिए असुरक्षित माहौल पैदा कर दिया है। इस मौके पर संतोष, शिल्पी, हरजिन्द्र कौर, कोमल, संतोष लोहारमाजरा, संतोष फरल, हीना, जन संघर्ष मंच हरियाणा के प्रधान फूल सिंह, सह-सचिव सोमनाथ, जिला प्रधान संसार चंद्र व अन्य मंच नेता भी मौजूद रहे।

कुरुक्षेत्र | महिला दिवस पर मार्च निकालते जन संघर्ष मंच के सदस्य।
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