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काम्यकेश्वर तीर्थ कमोदा से प्रवासी पक्षी जाने की तैयारी में

एक वर्ष पहले
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काम्यकेश्वर तीर्थ कमोदा में हजारों किलोमीटर की यात्रा कर प्रवासी पक्षी इस पवित्र सरोवर में अपने शीतकालीन प्रवास के लिए पहुंचे हैं। इन पक्षियों में सूचिपूछ बत्तख, सामान्य टील, नीलपक्ष टील, मैलार्ड, गढ़वाल, विजियन, शिखी पोचार्ड, पिंक शीर्ष बत्तख, सरपट्टी सवन, तिदारी बत्तख, सिख पर बत्तख, बेखुर बत्तख, छोटी सिल्ही और चेता बत्तख शामिल हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हथीरा के जीव विज्ञान प्राध्यापक डॉ. तरसेम कौशिक ने बताया कि मार्च में भी काम्यकेश्वर तीर्थ में प्रवासी पक्षी अठखेलियां करते देखे जा सकते हैं।

डॉ. कौशिक ने बताया कि अब प्रवासी पक्षियों की घर वापसी का समय नजदीक है क्योंकि प्रवासी पक्षी सर्दियों के आने के साथ ही हरियाणा के पोखरों, तालाबों व झीलों में अक्टूबर महीने में आना शुरु कर देते हैं और फरवरी व मार्च में अपने प्रजनन स्थल की तरफ जाना शुरु कर देते हैं।

डॉ. तरसेम कौशिक ने बताया कि पक्षियों के प्रजनन की प्रक्रिया हजारों वर्षों से जारी है और आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध तालाबों को प्रवासी पक्षी पसंद करते हैं। इसका कारण इन तालाबों में प्रवासी पक्षियों को भोजन, आश्रय और सुरक्षा आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इन तालाबों में विभिन्न प्रजातियों के लुप्त प्राय कछुए, पक्षी और अन्य जलीय जीवों का संरक्षण होता रहा है। काम्यकेश्वर महादेव मंदिर व तीर्थ भी आध्यात्मिक दृष्टि से महत्व रखता है। डॉ. कौशिक ने बताया कि काम्यकेश्वर तीर्थ ग्रामीण आबादी से दूर एकांत में स्थित है और तालाब में पर्याप्त मात्रा में जलीय पौधे हैं। इसके अलावा इस तालाब के चारों तरफ पेड़ भी हैं जहां प्रवासी पक्षियों को आराम करने के लिए जगह उपलब्ध हो जाती है।

कुरुक्षेत्र | काम्यकेश्वर तीर्थ कमोदा में प्रवासी पक्षी तैरते हुए।
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