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अपने मन की शांति को सदा बनाए रखें : जैन संत

एक वर्ष पहले
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यह संसार वियोग धर्मी है। जो चीज/वस्तु आज हमारे अधिकार में है, वो कभी भी हमारे हाथ से जा सकती है। आज का संयोग कल वियोग में बदल सकता है। किसी भी वस्तु का वियोग कभी भी हो सकता है परंतु मन की शांति को हमेशा बनाए रखना। अगर वो भी चली गई तो समझो आपने सब कुछ खो दिया।

आज सभी ये संकल्प लें कि किसी भी वस्तु का वियोग हो जाए, मैं मन की शांति को सदा बनाए रखूंगा। यह प्रवचन संघ शास्ता, शासन प्रभावक, योगीराज पूज्य गुरदेव श्री अरूण मुनि ठाणे-4 ने फतेहाबाद की ठाकर बस्ती स्थित जैन स्थानक में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति की जेब से 5 रुपये का नोट गिरता है तो कहता है ओह, मेरा नोट गिर गया परंतु नोट हंस कर कहता है, कल मैं किसी और की जेब में था, परसो किसी और की। मुझे सारे अपना मानते हैं। मैं किसी काे भी अपना नहीं कहता हूं। उन्होंने कहा कि हे मानव, तू मेरा-मेरी छोड़ कर प्रभु बंदगी में लग जा। प्रभु ही व्यक्ति का सही मायने में भला कर सकते हैं लेकिन मानव मोह माया में पड़कर भगवान का स्मिरण करना ही भूल गया है। इसी कारण वह आज तनाव, चिंता से ग्रस्त है। उसके मन को कहीं भी शांत नहीं मिल पा रही है। ठाकर बस्ती स्थित जैन स्थानक में प्रतिदिन प्रात: सवा 8 बजे प्रवचन होंगे वहीं दोपहर ढ़ाई से 3 बजे तक रोग मुक्ति का पाठ होगा। रात्रि 8 बजे प्रवचन होंगे। 14 मार्च को सक्रांति का विशेष पाठ गुरुदेवों द्वारा किया जाएगा।

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