ईएसआई डिस्पेंसरी में डाॅक्टराें अाैर कर्मचारियाें की कमी, मेडिकल सुविधाएं मिलने में हाे रही परेशानी

Karnal News - कर्मचारी राज्य बीमा निगम की ओर से कर्मचारियों को मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। लेकिन करनाल के सेक्टर-13...

Bhaskar News Network

Aug 12, 2019, 08:00 AM IST
Karnal News - haryana news lack of doctors and staff in esi dispensary trouble in getting medical facilities
कर्मचारी राज्य बीमा निगम की ओर से कर्मचारियों को मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। लेकिन करनाल के सेक्टर-13 ईएसआई डिस्पेंसरी में कर्मचारियों को मेडिकल की पूरी सुविधाएं प्राप्त नहीं हो रही हैं। ईएसआई में सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कोई हेल्पडेस्क नहीं है। इस कारण कर्मचारी मेडिकल सुविधाअाें से वंचित रह जाते हैं। ईएसआई से जिले के 33 हजार 843 कर्मचारी जुड़े हुए हैं। डिस्पेंसरी में हर माह करीब 90 लाेग अपना मेडिकल बिल जमा करा रहे हैं। लेकिन दाे तीन माह में सिर्फ अाधे बिल ही पास पाते हैं। करनाल के 70 वर्षीय बुजुर्ग श्याम सुंदर करीब नौ माह से मेडिकल बिल जमा कराने के लिए ईएसआई के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन अभी तक बिल पास नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि डॉक्यूमेंट के नाम पर केवल ईएसआई में चक्कर लगाने पड़ रहे हैं एेसे में कई कर्मचारी अब बिल भी यहां जमा नहीं कराते।

वहीं ईएसआई डिस्पेंसरी में केवल एक ही कंप्यूटर व प्रिंटर है। उसी से डिस्पेंसरी के सारे काम किए जाते हैं। पिछले सप्ताह लैब की शुरुआत की गई है। जिसमें सिर्फ ब्लड अाैर शुगर आदि की जांच होती है। डिस्पेंसरी में एक्स-रे कराने की सुविधा नहीं है। जबकि किडनी व लीवर की जांच के लिए सेमीऑटो एनालइजर मशीन के लिए अधिकारी की ओर से डिमांड की हुई है।

स्थानीय दो पैनल अस्पताल में हो रहे कर्मचारी रेफर : ईएसआई से स्थानीय दो पैनल अस्पताल में ही जून-जुलाई में 83 कर्मचारियों को रेफर किया गया है। जबकि कम इलाज वाले मरीजाें काे सरकारी या अन्य अस्पताल में भेजा जा सकता है। लेकिन अन्य अस्पतालाें अाैर मेडिकल कॉलेज में कम लाेगाें काे ही रेफर किया गया है। एेसे में डिस्पेंसरी अाैर डॉक्टरों की मिलीभगत की अाशंका जताई जा रही है। कर्मचारियों के रेफर किए गए डॉक्यूमेंट में काफी खामियां हैं जिस पर ईएसआई अधिकारियों काे जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए।

हो रही अनदेखी
करनाल. सेक्टर-13 ईएसआई डिस्पेंसरी में बारी का इंतजार करते लोग।

छुट्टियों का पैसा लेने लोगों को जाना पड़ता है पानीपत

यदि कोई कर्मचारी ईएसआई के माध्यम से इलाज कराता है तो उसे बाद में छुट्टियों का पैसा लेने पानीपत जाना पड़ता है। क्याेंकि करनाल में ईएसआई की ब्रांच का ऑफिस नहीं है। जबकि ईएसआई में रोजाना 200 ओपीडी आती है। कर्मचारियों को छुट्टियों का पैसा देने की सुविधा ईएसआई डिस्पेंसरी में भी शुरू की जा सकती है। यदि ईएसआई को अस्पताल में बदल दिया जाए।

ईएसआई में स्टाफ की कमी, तीन में से एक छुट्‌टी पर

तीन डॉक्टर सेक्शन उसमें भी एक डॉक्टर चाइल्ड केयर लीव पर है। एेसे में यदि काेई काई स्टाफ छुट्टी पर चला जाता है तो कर्मचारियों को इलाज कराने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। ईएसआई नियम अनुसार अभी दो डॉक्टर, दो फॉर्मास्टिक, एक अस्टिेंट क्लर्क दो एलएचवी एक एनएम की कर्मचारी की आवश्यकता है।

कागजी कार्रवाई में कमी मिलने पर हाेगी जांच


इधर...स्वास्थ्य मिशन योजना के कार्डों को अस्पताल के स्टाफ ने जलाया

बल्ला. अस्पताल परिसर में बिखरे पड़े कागजात और इनसेट में जलाए गए कार्ड।

बल्ला| सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में रखे लाखों राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के कार्ड अधिकारियों की लापरवाही के चलते अस्पताल परिसर में बिखरे पड़े हैं। ग्रामीणों ने कार्ड बिखरे होने की सूचना जब अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक चांदबाला काे दी। इसके बाद अस्पताल में स्थिति का जायजा लिया गया। कुछ देर बाद दो चतुर्थ कर्मचारी व एक स्टाफ नर्स वहां पर पहुंची और उन्होंने अस्पताल परिसर में बिखरे पड़े राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के कार्डों को आग के हवाले कर दिया। हैरानगी कि बात है कि सरकार की ओर से लाखों रुपए खर्च कर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच के लिए भेजे गए इन कार्डों संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों ने सदुपयोग करना उचित नहीं समझा और इन्हें आग के हवाले कर दिया। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना का शुभारंभ 12 अप्रैल 2005 में किया गया था। इस योजना के शुरू करने का उद्देश्य था कि ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे ग्रामीणों के स्वास्थ्य के देखभाल के उद्देश्य से बनाया गया था, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रह रही महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके। इस योजना के तहत सभी प्रकार की बीमारियों को रोकना एवं उन पर नियंत्रण रखना है। ग्रामीण स्वास्थ्य योजना के दौरान कार्य की प्रगति की रिपोर्ट बनाना एवं उस रिपोर्ट को जनता के सामने पेश करना है। सीएमओ रमेश कुमार का कहना है कि इस मामले की गहनता से जांच करवाई जाएगी।

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