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संकीर्णता, नफरत व भेदभाव के माहौल में साहित्य कार एवं बुद्धिजीवी निभाएं जिम्मेदारी

एक वर्ष पहले
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सैनी धर्मशाला में दो दिवसीय हरियाणा सृजन उत्सव का शुभारंभ सामूहिक रूप से संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के साथ हुआ। छत्तीसगढ़ से कानूनविद कनक तिवारी ने भारतीय संविधान और हम भारत के लोग विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान स्वतंत्रता आंदोलन की प्राप्ति है।

यह संविधान डॉ. आंबेडकर के बिना बन ही नहीं सकता था। आज संविधान राजपथ बन गया है, जिसे जनपथ बनाने की जरूरत है। तिवारी ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई आम आदमी की लड़ाई थी। जब संविधान बनाया तो आम आदमी के प्रतिनिधि संविधान बनाने के काम में शामिल थे, लेकिन साथ ही राजे-रजवाड़ों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल किए थे। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि हम भारत के लोग ही संविधान बना रहे हैं, लेकिन सरकारों की अनदेखी के चलते आज संविधान में से भारत के लोग गायब हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान की परिकल्पना जवाहर लाल नेहरू ने पेश की थी और डॉ. आंबेडकर ने इस परिकल्पना को साकार किया। 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ों आंदोलन युवाओं का आंदोलन था, जिसकी परिणति 1947 में आजादी के रूप में हुई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के चेयरमैन डॉ. सुभाष चन्द्र ने अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह वैचारिक उद्वेलन का समय है। संकीर्णताएं, नफरत व भेदभाव के माहौल में साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों की अहम भूमिका है। हरियाणा सृजन उत्सव इसी भूमिका पर विचार-विमर्श करने का मंच बन गया है। उद्घाटन सत्र की प्रो टीआर कुंडू ने की। संचालन अमित मनोज ने किया।

सृजन उत्सव के दूसरे सत्र में गांधी : आंबेडकर व भगत सिंह के चिंतन की सांझी जमीन विषय पर परिसंवाद हुआ। परिसंवाद में शहीद भगत सिंह के भांजे एवं चिंतक प्रो. जगमोहन ने कहा कि महात्मा गांधी की एक आवाज पर शहीद भगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद व साथी सत्याग्रह में पहुंचे थे। भगत सिंह द्वारा एसेंबली में आवाज करने वाला बम फेंकना और जेल में भूख हड़ताल करना यह दर्शाता कि गांधी और भगत सिंह के विचारों में कितनी समानता है। उन्होंने कहा कि शैक्षिक संस्थाओं से भगत सिंह को वैज्ञानिक विचार की जमीन मिली। इससे उनके सोचने का तरीका बदला। आगे चल कर भगत सिंह ने नौजवान भारत सभा बनाई, जिसका लक्ष्य था कि युवाओं के दिमाग से जात-पात व धार्मिक संकीर्णताओं की सोच को हटाकर वैज्ञानिक नजरिये वाला समाज बनाया जाए। गांधीवादी चिंतक प्रसून लतांत ने कहा कि गांधी, आंबेडकर व भगत सिंह तीनों धर्म का राजनीति के लिए इस्तेमाल के खिलाफ थे। सृजन उत्सव में प्रसिद्ध कवि गौहर रजा ने अपनी कविताएं पढ़ी। मौके पर पूर्व सांसद गुरदयाल सिंह सैनी, सैनी सभा के प्रधान गुरनाम सिंह सैनी, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आरआर फुलिया, एसपी सिंह भी उपस्थित रहे।

कुरुक्षेत्र-सैनी धर्मशाला में शुरू हुआ सृजन उत्सव।
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