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बिना सुझाव तैयार प्रस्तावित बजट पर पार्षदों में मलाल बोले- बीते वर्षों में अफसरों ने आय से खर्च कम दिखाए
नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी का सोमवार को 2020-21 का बजट पेश होने जा रहा है। सरकार से फंड पर कैंची चलने के बाद नगर निगम के लिए बजट तैयार करना ही चुनौती रहा, लेकिन विभागीय अफसरों की मानें तो आय के नए संसाधनों को शामिल कर अगामी बजट को बढ़ाया गया है। इसका खुलासा 16 मार्च की बजट मीटिंग में होगा। उधर, बीते वर्षों में प्रस्तावित बजट के बाद वास्तविक रिपोर्ट में आए कम आय और ज्यादा व्यय को देख निगम पार्षद अगामी बजट को भी रेत के महल जैसा बता रहे हैं। उनकी मानें तो अफसरों ने बीते वर्षों में बजट पेश कर पीठ थपथपाने को कागजों में खर्च को आय से कम दिखाया, लेकिन प्रॉपर्टी टैक्स, अष्टाम ड्यूटी, ट्रेड लाइंसेस जैसे आय के संसाधनों के तय लक्ष्य पूरे नहीं कर पाए। नगर निगम कार्यालय अधीक्षक से 11 मार्च को, 16 मार्च के लिए नगर निगम के एमसी रूम में बजट मीटिंग का पत्र जारी हुआ। पार्षदों में मलाल है कि पत्र चार दिन पहले ही मिला जबकि कुछ पार्षदों को अभी भी मीटिंग के बारे में जानकारी नहीं है। 16 मार्च की मीटिंग में अगामी 2020-21 के प्रस्तावित बजट पर अफसरों व हाउस मैंबर्स के बीच चर्चा होगी। पार्षदों की मानें तो पहले बीते वर्ष बजट की रिपोर्ट मांगेंगे और अफसरों से आय के तय लक्ष्य से चूकने की पूछेंगे।
बजट पर नहीं लिए पार्षदों के सुझाव, मनमर्जी का होगा विरोधः वार्ड-13 से कांग्रेस पार्षद निर्मला चौहान ने कहा कि इस बार भी नगर निगम के बजट पर पार्षदों के सुझाव नहीं लिए गए। अफसरों की मनमर्जी से तैयार बजट का विरोध होगा, चूंकि बीते वर्षों के प्रस्तावित बजट से आय कम और व्यय ज्यादा हुए जिससे नौबत यह आई कि पार्षदों के वार्डों में काम के लिए बार-बार फंड कम बता दिया गया। इस बार ऐसा नहीं होने देंगे और प्रस्तावित बजट में वास्तविकता कितनी, इस पर अफसरों से जवाब मांगेंगे।
प्रॉपर्टी टैक्स व रेंट रिकवरी में सख्ती के बजाए सुस्ती बरत रहे अफसरः वार्ड-21 से पार्षद अभिषेक मोदगिल ने कहा कि सवा साल में हुई तीन हाउस मीटिंग में पास हुए प्रस्तावों पर काम नहीं हुए। अफसर फंड की कमी का रोना रोते हैं, लेकिन निगम को सबसे ज्यादा आय वाले प्रॉपर्टी टैक्स व रेंट रिकवरी का लक्ष्य पाने में अफसर सख्ती के बजाए सुस्त हैं। सूची में सरकारी विभागों के दफ्तर भी बड़े डिफाॅल्टर हैं, जिन पर मेहरबानी की जा रही है जबकि इनसे ही रिकवरी होने पर शहर में विकास कार्यों के लिए फंड की कमी नहीं रहेगी।
5 वर्षों में मुख्य 14 संसाधनों का बजट व वास्तविक आय
वर्ष प्रस्तावित बजट वास्विक आय
2015-16 126.16 करोड़ 95.71 करोड़
2016-17 136.48 करोड़ 112.28 करोड़
2017-18 108.27 करोड़ 171.12 करोड़
2018-19 108.27 करोड़ 87.16 करोड़
नोट } 14 संसाधनों में प्रॉपर्टी टैक्स, अष्टाम ड्यूटी, डेवलपमेंट चार्जिस, रेंट, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, सेल ऑफ लैंड, तहबजारी-मलबा फीस, फायर टैक्स, एक्साइज ड्यूटी, सेनिटेशन टैक्स, लीज मनी, मिक्स इंकम, कंट्रीब्यूशन ऑफ ग्रांट शामिल है।)
प्रॉपर्टी टैक्स, अष्टाम ड्यूटी का लक्ष्य कभी 50 फीसद भी नहीं हुआ अचीव
प्रॉपर्टी टैक्स, अष्टाम ड्यूटी नगर निगम की आय के बड़े सोर्स हैं, जिसे अफसर पांच वर्षों में प्रस्तावित बजट में तय लक्ष्य से कभी 50 प्रतिशत भी अचीव नहीं कर पाए। प्रॉपर्टी टैक्स की बात करें तो 2015-16 में 60 करोड़ का बजट था, जिसमें 7 करोड़ 56 लाख 78 हजार 383 रुपए ही रिकवर हुए। 2016-17 में भी 70 करोड़ के तय बजट में 17 करोड़ 42 लाख 31 हजार 306 रुपए और 2017-18 में 73 करोड़ के तय बजट में 8 करोड़ 82 लाख 79 हजार 741 रुपए ही रिकवर हुए। वहीं 2018-19 में 50 करोड़ के बजट में 16 करोड़ रुपए रिकवर हो पाए। इसी तरह 2019-20 के बजट में 48 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी करनी थी, लेकिन इस लक्ष्य से 40 फीसद भी अचीव नहीं हुआ। इसी तरह अष्टाम ड्यूटी का 2015-16 में 25 करोड़ के बजट में 18 करोड़ 15 लाख 31 हजार 583 रुपए रिकवर हुए। 2016-17 में 20 करोड़ के बजट में 7 करोड़ 78 लाख 44 हजार 364 और 2017-18 में 20 करोड़ के बजट में 12 करोड़ 76 लाख 28 हजार 171 रुपए रिकवर हुए। 2018-19 में भी रेंट के 16 करोड़ बजट में करीब 13 करोड़ रिकवरी हुई जबकि बीते वर्ष में 18 करोड़ के रेंट रिकवरी में भी 50 फीसदी से ज्यादा लक्ष्य से पीछे रहे।
आय के नए संसाधनों को शामिल कर 16 मार्च को 2020-21 के प्रस्तावित बजट पर चर्चा होगी। इसमें व्यय से ज्यादा आय का लक्ष्य रहेगा, जिसे पाने पर भी फोकस रहेगा।
मदन चौहान, मेयर, नगर निगम।