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अधूरी विसरा रिपोर्ट देने पर डॉक्टर व मीटिंग में न आने से खनन अफसर सस्पेंड
जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की शनिवार को पंचायत भवन में हुई बैठक में दूसरी बार प्रदेश की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री कमलेश ढांडा ने अध्यक्षता की। पहली मीटिंग में जहां अधिकारियों के प्रति नरम रवैया रहा। वहीं इस बार परेशान और गुमराह करने वाले अधिकारियों के प्रति राज्यमंत्री सख्त दिखी। सिविल अस्पताल के एक चिकित्सक (वर्तमान में फूड सेफ्टी अधिकारी डेपूटेशन) को सस्पेंड करने के साथ उस पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। इस मामले में भी जितने भी अधिकारी व कर्मचारी लापरवाही बरती, उन पर भी एक्शन होगा। वहीं जिला खनन अधिकारी पर अवैध खनन को बढ़ावा देने के आरोपों और मीटिंग में मौजूद न होने पर सस्पेंड करने के निर्देश दिए। मीटिंग में पिछली बैठक की लंबित सात शिकायतों में से पांच इस बार भी लंबित ही रही। शिकायतकर्ताओं को अगली बैठक तक इंतजार करने का आश्वासन दिया गया।
पुजारी रामपाल मौत मामला उठा : दयालपुर निवासी रजनी ने बताया उसके पिता 29 नवंबर 2017 को खेत में पानी लगाने गए थे। खेत के पड़ोसी ने कुल्हाड़ी देने के बहाने अपनी डेयरी में उसके पिता को बुलाया। उसने गेट में करंट छोड़ा था। योजनाबद्ध तरीके से उसके पिता की हत्या की गई। बाद में डेयरी से कुछ दूर उन्हें लिटा दिया। उन्होंने कहा उसके पिता को हार्ट अटैक आया है। उससे मौत हुई है। शिकायतकर्ता युवती ने कहा शक होने पर उन्होंने पिता का पोस्टमार्टम कराया। पीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार उसके पिता के दिल, लीवर व फेफड़े का विसरा मेडिकल कॉलेज खानपुर भेजा दिखाया, लेकिन खानपुर मेडिकल कॉलेज ने केवल दिल का साइज बताया। मौत का कोई कारण न बताकर रिपोर्ट भेज दी।
एसडीएम की रिपोर्ट, मानी लापरवाही : मामले की जांच कर एसडीएम अश्विनी मलिक ने बैठक में रिपोर्ट रखी। एलएनजेपी के तत्कालीन चिकित्सक डॉ. संदीप चौधरी ने मृतक का पोस्टमार्टम किया था। उसकी लापरवाही इसमें स्पष्ट सामने आई है। चिकित्सक ने ब्रेन जिसे पोस्टमार्टम में मौत का कारण माना गया। उसका सैंपल नहीं भेजा। केवल दिल का भिजवाया गया, जबकि चिकित्सक ने अपनी रिपोर्ट और बयानों में दिल, लीवर और फेफड़े का विसरा भिजवाने की बात कही। जिला कष्ट निवारण समिति की सदस्य शकुंतला शर्मा ने भी कहा उक्त चिकित्सक, खानपुर मेडिकल लैब में सैंपल रिसीव करने वाले कर्मचारी की भी मिलीभगत है। लिहाजा चिकित्सक के साथ-साथ उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।