काल गणना के साथ नहीं मनी जयंती, विवाद से बचने को समय तय नहीं किया

Kurukshetra News - मार्गशीर्ष माह की एकादशी से पहले बुधवार को इंटरनेशनल गीता जयंती मुख्य महोत्सव का आगाज हुआ। सीएम व उत्तराखंड के...

Dec 04, 2019, 08:15 AM IST
मार्गशीर्ष माह की एकादशी से पहले बुधवार को इंटरनेशनल गीता जयंती मुख्य महोत्सव का आगाज हुआ। सीएम व उत्तराखंड के सीएम, राज्यपाल समेत कई हस्तियां पहुंची। गीता पूजन व यज्ञ के साथ विधिवत शुभारंभ किया। हालांकि इस बार सरकार की तरफ से गीता जयंती का काल निर्धारण नहीं दिखाया गया।

छह साल पहले 5151 वर्ष पहले गीता जन्म मानते हुए काल गणना के साथ जयंती मनाने की परंपरा शुरू की थी। बाद में भी बाकायदा काल गणना के साथ आयोजन हुए लेकिन इस बार गीता जयंती का काल निर्धारण प्रचार में नहीं दिखाया। न ही ऐसी कोई घोषणा की गई। सूत्रों के मुताबिक किसी तरह के विवादों के चलते ही अबके काल गणना को प्रचारित नहीं किया गया। हालांकि उक्त गणना के हिसाब से इस बार 5157वीं जयंती है। केडीबी मानद सचिव मदनमोहन छाबड़ा का कहना है कि गीता जयंती को पारंपरिक तरीके से ही मनाया जा रहा है। गीता जन्मतिथि भी विभिन्न गणनाओं के आधार पर तय की हुई है। काल गणना को प्रचारित ना करने को लेकर कोई खास वजह नहीं है।

6 साल पहले 5151वीं जयंती की थी घोषित, इसी गणना के हिसाब से आगे भी मनाई, पुरुषोत्तमपुरा में सीएम मनोहरलाल ने किया आगाज, राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य, स्वामी ज्ञानानंद, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, हिमाचल के विस अध्यक्ष, जिम्बाब्वे के प्रोटोकॉल अधिकारी, नेपाल के डिप्टी हाई कमिश्नर ने ब्रह्मसरोवर पर किया पूजन

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