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साहित्य सभा की मासिक गोष्ठी, किसान कहवै सै मन की बात, बैटया बरगी फसल मरगी क्यां ते हुई या बरसात
साहित्य सभा की मासिक गोष्ठी आरकेएसडी कॉलेज में अमृत लाल मदान की अध्यक्षता में हुई। संचालन रिसाल जांगड़ा ने किया। गोष्ठी की शुरुआत रविंद्र कुमार रवि ने महिला दिवस को समर्पित रचना से किया। रवि ने कहा कि कतरा-कतरा विष पीती है औरत, मरती है जीती है। उसमें है धरती सा संयम नहीं बताती क्या बीती है।... मधु गोयल-भारत के तुम नौजवानों सुन लो मेरी बात, नाइंसाफी बहुत हुई है महिलाओं के साथ।... बेमौसम बरसात से बर्बाद हुई फसल पर किसान की व्यथा को बताते हुए सतबीर जागलान ने कहा कि किसान कहवै सै मन की बात, क्यां ते हुई या बरसात, बैटया बरगी फसल मरगी, करी थी मेहनत दिन-रात।... ईश्वर गर्ग ने कहा हौसला, हिम्मत, रवानी सब गए जो थे जीवन की निशानी सब गए।... शमशेर कैंदल बोले मजहबी कत्लेआम शुमार है क्या, अमन पंसद गुनाहगार है क्या।... सतपाल शास्त्री ने महिला दिवस पर कहा कि आओ औरत का मान करें, जो रत रहती है औरों में उस औरत का गुणगान करें।... सोहन लाल सैनी ने कहा कि औरत अब अबला नहीं रही, हो गई है सबला। रामफल गौड ने कहा कि घटा झूठ की कद लग छावै, सूरज लिकड़ कै सच का आवै। ममता पावण खातर मां की रब भी बालक बण कै आवै।... रिसाल जांगड़ा ने कहा कि नारी देवी सै नारी तीर्थ धाम, शीश झुका कर मै करूं बार-बार प्रणाम।... कमलेश शर्मा ने कहा कि मैने जब भी देखा है मां को व्यस्त देखा है। बचपन में सोचा करता मां सोती कब है। अंत में अमृत लाल मदान ने कहा कि हम लाएंगे मां वैसी सुबह, सपनों में बसी जो ऐसी सुबह। इसके अलावा गोष्ठी में श्याम सुंदर शर्मा, दिनेश बंसल, डाॅ. चतुर्भुज बंसल, प्रीतम शर्मा व महेंद्र सारस्वत ने भी रचनाएं प्रस्तुत की।
कैथल | मासिक मीटिंग करते हुए साहित्य सभा।