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महज 3 किमी सड़क के लिए पहाड़ सी बाधाएं

एक वर्ष पहले
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सरकुलर रोड के बाद शहर की दूसरी लाइफ लाइन बावल रोड के लिए सिस्टम की पहाड़ सी बाधाएं दूर नहीं हो रही है। बारिश के बाद से तो बस स्टैंड से आईओसी तक के तीन किमी के हिस्से पर चलना भी मुश्किल हो गया है और गड्ढ़े इतने गहरे हो चुके हैं कि 5 मिनट का सफर ही 15 मिनट में तय हो रहा है। सड़क को संभालने वाले हाइवे प्राधिकरण का कहना है कि पीडब्ल्यूडी मरम्मत करा ले हम पैसा देने को तैयार जबकि विभाग का कहना है इसके लिए साढ़े 6 करोड़ रुपए की जरूरत है।

फुटबाॅल बनी सड़क, कभी पीडब्ल्यूडी तो कभी हाईवे प्राधिकरण की

दरसल बावल रोड की हालत पिछले एक दशक में फुटबाल सी बनी हुई है। बावल-पानीपत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-71 के निर्माण के दौरान यह सड़क हाइवे प्राधिकरण रोहतक के पास थी। नाईवाली चौक से आईओसी चौक का यह हिस्सा प्राधिकरण के पास था। इसी बीच यह सड़क फिर लोक निर्माण विभाग के पास आ गई थी। अब इस सड़क को रेवाड़ी-जैसलमेर राष्ट्रीय राजमार्ग-11 का हिस्सा मानकर हाइवे प्राधिकरण को हस्तांतरित किया जा चुका है।

प्राधिकरण द्वारा करीब तीन माह पहले इस सड़क को ओवरटेक किया जा चुका है लेकिन इसको सुधारने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है। इसके चलते लोक निर्माण विभाग की तरफ से इसकी जिम्मेदारी हाइवे प्राधिकरण की बताकर मरम्मत को लेकर असमर्थता जताई जा रही है। अब जिले में तीन दिन तक हुई बारिश के सबसे बदतर हालत इसी सड़क मार्ग की बनी हुई है। आलम यह है कि पानी की निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के बाद भी पूरी सड़क पानी में डूबी हुई और गहरे गड्ढ़े बन गए हैं।

हस्तांतरित करने से पहले पीडब्ल्यूडी ने मांगे साढ़े 6 करोड़ रुपए

जब यह सड़क पीडब्ल्यूडी के पास थी तब भी इसको लेकर किसी भी स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। जिला की तमाम सड़कों के लिए सरकार की तरफ से दरियादिली दिखाई गई लेकिन इस सड़क को लेकर किसी का भी ध्यान नहीं गया। नतीजा जब पीडब्ल्यूडी ने इस सड़क को हाइवे प्राधिकरण को हस्तांतरित किया उसी के साथ साढ़े 6 करोड़ का एस्टीमेट भी दिया था ताकि इस सड़क की स्थिति को सुधारा जा सके। प्राधिकरण की तरफ से यह बजट नहीं दिया गया।


सचिवालय से लेकर जयपुर तक का रूट

इस मार्ग पर जिला सचिवालय भी जिसकी वजह से इस मार्ग से प्रतिदिन जिला प्रशासन के अधिकारी भी गुजरते हैं लेकिन सड़क के गड्ढ़े उनको नजर नहीं आते हैं। शहर को यह मार्ग दिल्ली-जयपुर राजमार्ग से भी जोड़ता है जिसकी वजह से यहां से प्रतिदिन हरियाणा व राजस्थान रोडवेज की बसों के अलावा औद्योगिक इकाइयों के भी वाहन गुजरते हैं। इस सड़क की वजह से सभी को परेशान होना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री खट्‌टर आए तो रात को ही दे दिए 5 लाख

सिस्टम जब जागता है जब कोई वीआईपी मूवमेंट हो या कोई हादसा होता है। 12 जनवरी को जब शहर में विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में राज्य स्तरीय मैराथन का आयोजन किया गया तब बावल रोड सहित प्राधिकरण के तहत आने वाली सड़कों की मरम्मत के निर्देश दिए गए थे। उस समय प्राधिकरण की तरफ से 8 जनवरी की रात को पीडब्ल्यूडी के पास 5 लाख रुपए का फंड जारी कर दिया था जिसके बाद आनन-फानन में प्राधिकरण की सड़कों की मरम्मत कराई गई। अब सड़क की हालत वही हो गई जिसके बाद अब मरम्म्त को लेकर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है।

यह सही है कि बावल रोड का यह हिस्सा हमें हस्तांतरित हो चुका है लेकिन अभी हमारे पास इस कार्य के लिए कोई एजेंसी नहीं है। इसके चलते हमने पीडब्ल्यूडी से कहा था कि वह इस सड़क की मरम्मत कराकर बिल प्राधिकरण को भेज सकती है जिसका भुगतान हो जाएगा। इससे पहले भी विभाग को मरम्मत का बजट दिया जा चुका है और हमने भी तुरंत ही बजट दे दिया है। साढ़े 6 करोड़ के बजट के लिए अभी कार्रवाई की जा रही है जिसका बजट अभी मंजूर नहीं हुआ है। -पीके कौशिक, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, हाइवे प्राधिकरण एनएच-11

हमने इस सड़क के लिए साढ़े 6 करोड़ का एस्टीमेट प्राधिकरण को भेजा था ताकि इस सड़क की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। प्राधिकरण उस पर ध्यान नहीं दे रही है जबकि यह हिस्सा उनको हस्तांतरित भी हो चुका है। मरम्मत के लिए भी केवल मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए पैसे दिए थे। अगर प्राधिकरण पैसा देता है तो हम मरम्मत को तैयार है। -राकेश दीपक, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग।

राजीव चौक से महाराणा प्रताप चौक बावल रोड के हालात।

महाराणा प्रताप चौक से बावल रोड गड्‌ढ़ों में तब्दील।
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