स्क्रीनिंग से प्रथम चरण में ही बीमारी का पता लगाकर इलाज कर रहें हैं एनसीडी क्लीनिक

Sonipat News - लोगों की दिनचर्या और खानपान में बदलाव आने से लोग जल्दी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:42 AM IST
Gohana News - haryana news ncd clinics are treating and detecting the disease in the first phase of screening
लोगों की दिनचर्या और खानपान में बदलाव आने से लोग जल्दी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रीनिंग के माध्मय से प्रथम चरण में ही बीमारी का पता लगाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में पीएचसी पर भी एनसीडी क्लीनिक खोले थे। जहां पर ओपीडी में आने वाले और कैंप लगाकर मरीजों की जांच करके बीमारी का पता लगाने का कार्य किया जा रहा है। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन एनसीडी क्लीनिक के स्टॉफ द्वारा 70 से 80 मरीजों की जांच की जा रही है।

विभाग ने क्लीनिक में फिलहाल पांच बीमारियों का पता लगाने के लिए टेस्ट कराया जा रहा है। इनमें ब्लड शुगर, एचबी, ह्रदय संबंधी बीमारी, पैरालिसिस और कैंसर आदि शामिल हैं। योजना के अनुसार जो भी मरीज ओपीडी में जाएगा, जांच के दौरान यदि डॉक्टर को पांच बीमारियों में से किसी भी एक बीमारी का कोई भी एक लक्षण दिखाई देगा तो वह टेस्ट कराने के लिए क्लीनिक में भेजेगा। जहां पर स्टॉफ द्वारा उसका टेस्ट करके रिपोर्ट डॉक्टर के पास भेजेगा। जिसके आधार पर मरीज का उपचार शुरू किया जाएगा। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 600 से 650 मरीजों की ओपीडी हैं। इनमें से 70 से 80 मरीज पांच बीमारियों की जांच कराने के लिए क्लीनिक पहुंच रहे हैं। ब्लड शुगर व एचबी के मरीज अधिक मिल रहे हैं।

सिविल में खोले क्लीनिक में रोज 70 से 80 मरीज करा रहे जांच, नॉन कम्युनिकेबल डिजीज मरीजों की हो रही पहचान

गोहाना. गांव के कैंप में महिला की जांच करते एनसीडी क्लीनिक का स्टॉफ।

स्क्रीनिंग के लिए आशा वर्कर और स्टॉफ को दी ट्रेनिंग

विभाग द्वारा आशा वर्कर और क्लीनिक स्टॉफ को मरीजों की जांच करने और मरीजों को बीमारियों के बचाव की जानकारी देने के लिए ट्रेनिंग दी हुई हैं। स्टॉफ द्वारा गांव में निशुल्क जांच कैंप भी लगाया जाता है। इस दौरान लोगों की जांच की जाती है और उन्हें बीमारी के लक्षण व बचाव के उपाय भी बताए जाते हैं। क्लीनिक इंचार्ज मिथलेश के अनुसार कैंप में लोगों को बीमारी लक्षण दिखाई देने पर तुंरत अस्पताल में जाकर जांच कराने की सलाह दी जाती है।

प्रतिदिन मुख्यालय भेजी जाती है रिपोर्ट

क्लीनिक में नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के कितने मरीजों की जांच की गई, इसकी रिपोर्ट प्रतिदिन मुख्यालय भेजी जाती है। प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी द्वारा यह रिपोर्ट भेजी जाती है। अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट के आधार पर यह पता चल जाता है कि किस क्षेत्र में किस बीमारी के मरीज बढ़ रहे हैं। उसके अनुसार क्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम चलाने के साथ-साथ उस बीमारी के इलाज के लिए स्पेशलिस्ट भी नियुक्त किए जाएंगे।

तनाव और दिनचर्या में बदलाव होने से बढ़ रहे मरीज

एसएमओ डॉ.कर्मबीर का मानना है कि एक-दूसरे से आगे निकलने की होड और दिनचर्या व खानपान में बदलाव होने से लोग जल्दी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बीपी, ह्रदय संबंधी बीमारी और शुगर के मरीजों के बढ़ने का एक कारण यही है। जागरूकता कैंप के दौरान लोगों को दिनचर्या में बदलाव करके साथ-साथ खानपान पर भी ध्यान देने के लिए कहा जाता हैं। उन्होंने कहा कि बीमारी का लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। प्रथम चरण में बीमारी का पता लगने पर इलाज संभव है।

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