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कोई तिथि क्षय नहीं, इस बार पूरे 9 दिन के होंगे नवरात्र
इस बार नवरात्रि में कोई तिथि क्षय न होने से पूरे 9 दिन नवरात्रि मनाई जाएगी वही सालों बाद कई शुभ संयोग बनने से अबकी बार नवरात्र खास भी होंगे। छपारिया हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित रामकिशन गोवर्धन-मथुरा वाले ने बताया कि इस बार चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से प्रारंभ होंगे तथा इसी दिन से हिंदुओं का नव संवत 2077 भी प्रारंभ होगा वहीं इस बार नवरात्रि में कई शुभ संयोग बनने से नवरात्रि खास भी रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस बार नवरात्रि में पूरे 9 दिन नवरात्रि होगी तथा 9 दिन तक 9 देवियों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी।
नवरात्रि में शुभ संयोग : चैत्र नवरात्रि के साथ हिंदू नववर्ष तो प्रारंभ होता ही है बल्कि इस बार चैत्र नवरात्रि में कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं जिनकी वजह से अबकी बार चैत्र नवरात्रि कुछ खास होंगे।
पंडित रामकिशन ने बताया कि इस बार चैत्र नवरात्र में चार
सर्वार्थ सिद्धि योग, पांच रवि और द्विपुष्कर योग बन रहा है जोकि ज्योतिष मान्यता के अनुसार शुभ माना जाता है। वहीं अक्सर नवरात्रि में कई बार दो तिथि एक ही दिन पड़ जाने के कारण नवरात्रि के दिनों की संख्या आठ रह जाती है जिसे तिथि का क्षय होना कहा जाता है। लेकिन अबकी बार नवरात्रि में कोई तिथि क्षय नहीं हो रही है। अतः इस बार चैत्र नवरात्रि पूरे 9 दिन होने व शुभ संयोग बनने के साथ खास होंगे।
जानिए...चैत्र नवरात्रि से क्यों शुरू होता है हिंदू नववर्ष
छपारिया हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित रामकिशन ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के आरंभ का समय चैत्र नवरात्र का पहला दिन माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन देवी ने ब्रह्माजी को सृष्टि की रचना करने का कार्यभार सौंपा था, इसी दिन से काल गणना शुरू हुई थी। देवी भागवत पुराण के अनुसार इसी दिन देवी मां ने सभी देवी-देवताओं के कार्यों का बंटवारा किया था। इसलिए चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष का प्रारंभ माना जाता है। देवी पुराण के अनुसार सृष्टि के आरंभ से पूर्व अंधकार का साम्राज्य था तब आदि शक्ति जगदंबा देवी अपने कुष्मांडा अवतार में भिन्न वनस्पतियों और दूसरी वस्तुओं को संरक्षित करते हुए सूर्य मंडल के मध्य में व्याप्त थी। उन्होंने बताया कि जगत निर्माण के समय माता ने ही ब्रह्मा विष्णु और भगवान शिव की रचना की थी। इसके बाद सत,रज और तम नामक गुणों से तीन देवियां लक्ष्मी, सरस्वती और काली माता की उत्पत्ति हुई। आदि शक्ति की कृपा से ही ब्रह्माजी ने इस संसार की रचना की थी। मां ने ही भगवान विष्णु को पालनहार और शिवजी को संहारकर्ता बनाया और सृष्टि के निर्माण का कार्य संपूर्ण हुआ। इसलिए सृष्टि के आरंभ की तिथि से 9 दिनों तक मां अंबे के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दिन से ही पंचांग की गणना भी की जाती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ माना जाता है।
सालभर में वैसे तो चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ माह में कुल मिलाकर चार बार नवरात्र आते हैं। लेकिन चैत्र और आश्विन माह के नवरात्र काफी लोकप्रिय हैं क्योंकि वसंत ऋतु में होने के कारण चैत्र नवरात्र को वासंती नवरात्र तो शरद ऋतु में आने वाले आश्विन मास के नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहा गया है। नवरात्र के 9 दिनों में मां के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है जोकि अबकी बार चैत्र नवरात्रि में 25 मार्च बुधवार को होगी। इसके बाद पूजा-अर्चना के साथ लगातार 9 दिन तक या फिर अपनी श्रद्धा अनुसार माता के भक्त गण प्रथम नवरात्रि व आखिरी नवरात्रि का व्रत रखते हैं।
साल में आते हैं चार नवरात्र