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शहर में અઅઅઅअब हर મअમस्पताल से बार कोड से उठेगा बॉयो मेडिकल वेस्ट, सिविल अस्पताल में रोजाना Rs.8 प्रति बेड आएगा खर्च

Jind News - सुरेंद्र भारद्वाज . जींद | सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की गाइडलाइन के बाद जिले के सभी सरकारी व प्राइवेट...

Nov 19, 2019, 08:01 AM IST
Jind News - haryana news now every 8 hours in the city will rise from bar code to bio medical waste rs8 per bed per day will be spent in civil hospital
सुरेंद्र भारद्वाज . जींद | सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की गाइडलाइन के बाद जिले के सभी सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों से अब बॉयो मेडिकल वेस्ट का उठान बार कोड के अनुसार होगा। सिविल अस्पताल से शीघ्र ही इसकी शुरुआत की जाएगी। इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने दिव्या वेस्ट मैनेजमेंट व जीओ कंपनी को एक साल के लिए टेंडर दिया है। इस दौरान संबंधित कंपनी को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकार द्वारा निर्धारित रेट के अनुसार रोजाना 8 रुपए प्रति बेड के हिसाब से पेमेंट की जाएगी। इसके अलावा स्टिकर व बार कोड के लिए अलग से पेमेंट की अदायगी करनी होगी। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की गाइड लाइन व सरकार द्वारा बॉयो मेडिकल वेस्ट उठान के लिए रेट निर्धारित किए जाने से मेडिकल वेस्ट का सही से निस्तारण हो सकेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग को भी अब हर महीने बॉयो मेडिकल वेस्ट उठान पर होने वाले खर्च में बचत होगी। फिलहाल सिविल अस्पताल में मेडिकल बॉयो वेस्ट के उठान पर हर माह 70 हजार रुपए की राशि खर्च करनी पड़ रही है। अब नई गाइडलाइन से हुए टेंडर से यह खर्च घटकर प्रतिमाह 50 हजार रुपए तक आने की उम्मीद है।

बार कोड व स्टिकर के लिए स्वास्थ्य विभाग को सरकार द्वारा निर्धारित रेट के अनुसार देनी होगी अलग से फीस

बार कोड के लिए साल में एक बार ली जाएगी फीस

सरकार द्वारा बॉयो मेडिकल वेस्ट उठान के लिए निर्धारित रेट के अलावा बार कोड के लिए साल में एक बार अस्पताल में बेड की संख्या के अनुसार फीस ली जाएगी। इस फीस को भी सरकार द्वारा निर्धारित कर दिया गया है। इसके अलावा बॉयो मेडिकल वेस्ट बैग पर लगने वाले स्टिकर के लिए 1 रुपए 10 पैसे अलग से संबंधित अस्पताल से ली जाएंगे।

क्या है बार कोड व स्टिकर

सभी अस्पतालों को बॉयो मेडिकल वेस्ट उठान के लिए एक बार कोड लेना होगा। इस बार कोड के अनुसार अस्पताल से बॉयो मेडिकल वेस्ट का उठान होगा। जिस बैग से मेडिकल वेस्ट उठान होगा उस पर एक स्टिकर लगेगा। इसके बाद जिस अस्पताल से बॉयो मेडिकल वेस्ट का उठान होगा वहां पर स्टिकर स्कैन किया जाएगा। इस दौरान किस अस्पताल का बायो मेडिकल वेस्ट है इसका वजन कितना है इसका पूरा ब्याेरा ऑनलाइन पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को जााएगा। जहां पर बॉयो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण होगा वहां पर फिर से स्टिकर को स्कैन किया जाएगा।

जींद. सिविल अस्पताल के पीछे फेंका जा रहा कूड़ा।

इधर, अस्पताल में खुले में फेंका जा रहा कूड़ा

सिविल अस्पताल में बॉयो मेडिकल वेस्ट के लिए स्वास्थ्य विभाग व पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा कई तरह के कदम उठाए गए हैं। इस पर हजारों रुपए हर माह खर्च किए जाने का प्रावधान किया गया है लेकिन सिविल अस्पताल से रोजाना निकलने वाले कूड़े (म्यूनिसिपल वेस्ट) के निस्तारण या उठान का कोई भी प्रबंध नहीं किया गया है। लंबे समय से अस्पताल के पीछे इसे फेंका जा रहा है। समय-समय पर इस कूड़े में अस्पताल कर्मचारियों द्वारा आग लगा दी जाती है। इसके कारण जहां प्रदूषण फैलता है। वहीं अस्पताल में लगे कूड़े के ढेर के कारण बीमारियां फैलने का भी खतरा बना रहता है।

शहर के अस्पतालों से रोजाना निकलता है करीब 3 क्विंटल बॉयो मेडिकल वेस्ट

शहर के सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों से अनुमान है कि रोजाना करीब 3 क्विंटल बॉयो मेडिकल वेस्ट निकलता है। कुछ अस्पतालों को छोड़ दें तो अधिकतर अस्पतालों से निकले इस बॉयो मेडिकल वेस्ट का इस समय सही से निस्तारण नहीं हो रहा। कुछ अस्पतालों ने ही इसके निस्तारण की व्यवस्था की हुई है।

जींद. बायो मेडिकल वेस्ट के लिए सिविल अस्पताल गायनी वार्ड में रखे गए डस्टबिन।

प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों से बॉयो मेडिकल वेस्ट उठान के लिए निर्धारित किए गए हैं ये रेट

अस्पताल कैटेगरी निर्धारित रेट








इसलिए उठाया कदम, ताकि सही से हो सके बॉयो मेडिकल का निस्तारण : पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा ये सब कदम बॉयो मेडिकल वेस्ट का सही से निस्तारण हो सके। उसके लिए उठाया गया है। बॉयो मेडिकल वेस्ट के सही से निस्तारण न होने व इसके जलाने से जहां काफी प्रदूषण होता है। वहीं मेडिकल वेस्ट से बीमारियां होने का काफी खतरा रहता है।

बार कोड से जल्द होगा मेडिकल वेस्ट का उठान


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