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नौकरियों में सामाजिक आर्थिक आधार पर मिल रहे नंबरों ने बढ़ाई सामान्य आवेदकों की टेंशन

एक वर्ष पहले
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प्रदेश सरकार की ओर से नौकरियों में सामाजिक व आर्थिक आधार पर दिए जा रहे नंबरों ने सामान्य श्रेणी के आवेदकों की टेंशन बढ़ाई है। भले ही मेरिट पर नौकरियां देने के दावे करके सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन आरक्षण के जाल में उलझकर नौकरी पाने से वंचित हो रहे सामान्य श्रेणी के आवेदक इसे मेरिट से खिलवाड़ करने का नाम दे रहे हैं। दरअसल सामाजिक आधार पर संवैधानिक तरीके से प्रदेश सरकार पहले ही 50 प्रतिशत आरक्षण दे रही है। इसमें एससी उम्मीदवारों को 20 प्रतिशत, बीसी ए और बी को 27 प्रतिशत और तीन प्रतिशत शारीरिक विकलांगता के आधार पर आरक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद 2018 में हरियाणा सरकार ने सामाजिक आर्थिक आधार पर भी आवेदकों को 10 नंबर देने का प्रावधान शुरू कर दिया। इसी दौरान केंद्र सरकार की ओर से सामाजिक आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर सामान्य श्रेणी के लिए 10 प्रतिशत का आरक्षण देने का प्रावधान भी शुरू कर दिया। इस तरह आरक्षण बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है। इसके बाद भी 10 नंबर और दिए जा रहे हैं।

मंत्रियों और अधिकारियों के सामने उठाया मुद्दा नहीं समाधान : सामाजिक कार्यकर्ता मोनिका भारद्वाज ने बताया कि वे इस मुद्दे को लेकर कई बार सामान्य वर्ग के आवेदकों के साथ मंत्रियों और अधिकारियों से मिली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन आधारों पर 10 नंबर देना तय किया है वो खुद विरोधाभासी हैं और इसमें अनियमितता भी है। इसके चलते इससे जुड़े सैकड़ों केस कोर्ट में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि 40 प्रतिशत अनारक्षित श्रेणी में सामान्य श्रेणी, दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी, आरक्षित श्रेणी के वे बच्चे जो ज्यादा नंबर लेकर मेरिट में आकर सामान्य श्रेणी में जुड़ जाते हैं और सामान्य श्रेणी के वे बच्चे जो कम नंबरों के बावजूद इन 5 व 10 नंबरों की बदौलत मेरिट सूची में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा वर्तमान में जहां मेरिट में एक-एक नंबर का महत्व है ऐसे में सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए सरकारी नौकरी पाना बेहद मुश्किल साबित होगा।

यह है 10 नंबर देने का आधार

अगर अभ्यर्थी/उसके माता/पिता/प|ी/भाई/पुत्र में से किसी ने कभी किसी सरकारी विभाग में/ राज्य सरकार/ केंद्र सरकार में नौकरी नहीं की है तो उसे पांच नंबर दिए जाएंगे। दूसरा अगर आवेदनकर्ता पहली और दूसरी संतान हो और पिता 42 वर्ष की आयु से पहले गुजर चुके हों तब या आवेदनकर्ता पहली और दूसरी संतान हो और उसके 15 वर्ष होने से पहले पिता गुजर जाए तब उसे पांच नंबर मिलेंगे। तीसरा अनुभव के आधार पर। इन तीनों कैटेगरी में अधिकतम 10 नंबर दिए जा सकते हैं।

यह पड़ रहा असर : भारद्वाज ने बताया कि पिछले दिनों वाईएमसीए यूनिवर्सिटी फरीदाबाद में क्लर्क की 12 पोस्ट में 11 के पास सामाजिक आर्थिक आधार के नंबर थे। इसके अलावा पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंस में क्लर्क के 120 पदों पर सामाजिक आर्थिक आधार के नंबरों के चलते सामान्य श्रेणी के मेरिट में आ रहे अधिकतर आवेदक मेरिट सूची से बाहर हो गए।
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