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सिटी में 1727 में से 200 पात्रों को ही मिला पीएमएवाई का लाभ, कइयों ने नए के चक्कर में पुराना मकान भी तोड़ा

एक वर्ष पहले
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करीब दो साल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कैथल सिटी में मात्र 200 पात्रों तक ही योजना का आधा-अधूरा लाभ पहुंच पाया है। जबकि सिटी में 1727 पात्र हैं। अगर इसी गति से पात्रों तक योजना पहुंची तो न तो जाने कितने ही साल बीत जाएंगे। कुछ ऐसे लोग भी है, जो अपने घरों को खो बैठे हैं। पात्र होने का पत्र मिलने और अधिकारियों द्वारा नींव तैयार करने के निर्देश पर लोगों ने अपने पुराने घर तोड़ दिए। कोई अपनी ही जगह पर झोपड़ी बना कर परिवार समेत गर्मी, सर्दी बरसात सहने को मजबूर है तो कोई किराए के मकान में रहने को मजबूर है। उन्हें न तो नए बनाने के लिए राशि मिली और न ही कहीं सुनवाई हो रही है। कहीं अवैध कॉलोनी का अड़गा है तो कहीं किला नंबर गलत होने पर योजना के पात्रों की राशि रोक ली गई है।

अब तक 1725 पात्रों में से 200 लोगों तक ही पहुंचा आधा-अधूरा लाभ| वर्ष 2017 में शहरवासियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया। उसके बाद 2018 में लोगों को पात्र होने के पत्र मिले। इसके बाद भी वर्ष 2020 तक मात्र 200 पात्रों तक योजना का आधा-अधुरा लाभ पहुंचा है। इसमें 149 लोगों को दूसरी और शेष को पहली किस्त ही मिल पाई है। वहीं बताया जा रहा है कि करीब 50 पात्रों को जल्द ही पहली किस्त जारी कर दी जाएगी। जबकि जिले में 4880 पात्रों को इस योजना का पात्र माना गया है। बता दें कि कैथल में 1727, पूंडरी में 601, चीका में 1006, कलायत में 662, राजौंद में 884 पात्र हैं।

नक्शा पास होने के बाद ही तोड़ें मकान, वरना हो सकती है परेशानी

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नियमानुसार पात्र होने के बावजूद काफी लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। न ही अधिकारी उनकी सुनवाई कर रहे हैं। क्योंकि योजना के तहत पात्र उन्हें ही माना जा रहा है, जिनके मकान या जगह अप्रूवड कॉलोनी में है। लेकिन जानकारी के अभाव में लोग अपने मकान तोड़ देते हैं। जिस कारण समस्या खड़ी हो रही है। इसलिए पीएमएवाई योजना के पात्र होने के बावजूद अधिकारियों से पूरी जानकारी लें।

सरकार के आदेशानुसार पीएमएवाई के तहत अवैध कॉलोनियों में लाभ नहीं दे सकते हैं। अगर कोई पात्र सभी नियम पूरे करता हो और उसको फिर भी राशि नहीं मिल रही है तो वह उनसे मिल सकता है। समस्या का हल करवाया जाएगा।
अशोक कुमार, ईओ नगर परिषद

दरवाजा तक नहीं चोरी के डर से नींद भी नहीं आती: राजबीर

वार्ड 23 की गैबी साहब कॉलोनी निवासी राजबीर ने बताया कि वह कचोरी बनाने का काम करता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसे पात्र बताया गया और पत्र जारी किया गया। पहले उसे 2018 में 2.50 लाख की राशि मिलने का पत्र मिला। उसके बाद वर्ष 2019 में कहा गया कि वे 1.50 लाख ही मिलेंगे। उसे कहा गया कि वह नींव भरने के बाद अधिकारियों को सूचित करे। इस दौरान उसने अपना पुराना घर तोड़ दिया और नींव भर ली। बाद में उसे पता चला कि नक्शा पास करवाना है। लेकिन किला नंबर कागजों में कहीं गलत होने के कारण उसका आज तक नक्शा पास नहीं हुआ और न ही उसे कोई पैसा मिला। तीन बार नप अधिकारियों की ओर से मकान के फोटो भी लिए गए। लेकिन हुआ कुछ नहीं। आज स्थिति यह है कि से उसे किराए के मकान में रहना पड़ रहा है ।

दो साल से झोपड़ी में बीत रही कुलदीप की जिंदगी

पंथ नगर वार्ड सात निवासी कुलदीप कुमार ने बताया कि उसे वर्ष 2018 में पीएमएवाई पात्र होने का पत्र मिला। अधिकारियों ने नींव भर कर सूचना देने को कहा। अपने दो पुराने पक्के कमरे तोड़ दिए और नींव तैयार करवा ली। उसने इस बारे में नप में सूचना दी। अधिकारियों ने उससे नक्शा पास करवा कर आने को कहा, लेकिन तब उसे पता चला कि उसका मकान अवैध कॉलोनी में है। जिस कारण उसको प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राशि नहीं मिल सकती है। अब कुलदीप दो साल से अपनी ही जमीन पर झोपड़ी में परिवार के साथ रह रहा है। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

कैथल| मकान की नींव पर खड़े होकर पात्रता होने का पत्र दिखाते राजबीर

कैथल| पीएमएवाई का पात्र कुलदीप मकान तोड़ने के बाद झोपड़ी में रहने को मजबूर व पात्रता का पत्र दिखाते हुए।
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