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नियमित शिक्षक ही करेंगे सीबीएसई बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन
सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं अंतिम चरण में हैं। बोर्ड ने इस बार जहां परीक्षाओं को लेकर सख्ती बरती है, वहीं अबकी बार दोनों कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के नियमों में बदलाव करते हुए ये कार्य केवल नियमित शिक्षकों से ही कराए जाने का फैसला लिया है। इसके लिए बोर्ड ने संबंधित स्कूलों से नियमित शिक्षकों की सूची मंगवाई है। बोर्ड ने तदर्थ शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य में लगाने की स्थिति में सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। स्वामी विवेकानंद स्कूल के प्रिंसिपल तपोश भट्टाचार्य का कहना है कि बोर्ड ने अच्छा फैसला लिया है। निश्चित ही ये विद्यार्थियों के हित में होगा।
बोर्ड ने स्कूलों के लिए एफिलिएशन बायलॉज के नियमत 14.4 के तहत सख्त प्रावधान है कि कॉपी जांचने का कार्य केवल नियमित शिक्षक ही करेंेगे। इस नियम को इस बार सख्ती से लागू किय जा रहा है। इन दोनों कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने में केवल नियमित शिक्षकों को लगाया जाएगा। इनकी सूचि भी बोर्ड ने मांगी है। बोर्ड ने निर्देशों बताया है कि तदर्थ शिक्षकों का नाम भेजा तो अधिक जुर्माने के साथ मान्यता वापस लेेने तक की कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
ये हैं कारण } सीबीएसई के अधिकांश स्कूल दोेनों कक्षाओं की कॉपी मूल्यांकन कार्य को गंभीरता से नहीं लेेते। स्कूल में कार्यरत अस्थायी तदर्थ शिक्षकों से ही कॉपियों का मूल्यांकन कराते हैं। इसका असर विद्यार्थियों के प्राप्तांक पर पड़ता है। अक्सर अंकों में गड़बड़ से परीक्षा परिणाम में उलटफेर हो जाता है। कॉपी मूल्यांकन सही नहीं होने पर बोर्ड की छवि प्रभावित होती है। स्क्रुटनी के नंबर घटने बढ़ने पर पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ जाती है। इसी बात को ध्यान में रखकर ये नियम बनाया गया है।
कॉपी मूल्यांकन की भी की जाएगी जांच
बोर्ड परीक्षा के छात्रों की कॉपियों के मूल्यांकन की भी जांच की जाएगी। ये जांच कई स्तर पर होगी। इसमें सॉफ्टवेयर की मदद भी ली जाएगी। परीक्षकों, जांचकर्ताओं व अन्य अधिकारियों की ओर से कॉपियों के मूल्यांकन की जांच किए जाने के बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से भी जांच होगी ताकि मूल्यांकन में किसी तरह की गड़बड़ी पकड़ में आ सके। समय पर उसमें सुधार भी हो सके जिससे बाद में विद्यार्थियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।