अनाजमंडी में धान की आवक शुरू

Kurukshetra News - अनाजमंडी में धान की आवक शुरू हो गई है। सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण किसानों को अपनी धान प्राइवेट डीलरों को बेचनी...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:57 AM IST
Ismailabad News - haryana news paddy arrivals begin in grainmandi
अनाजमंडी में धान की आवक शुरू हो गई है। सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण किसानों को अपनी धान प्राइवेट डीलरों को बेचनी पड़ रही है। इस समय अनाजमंडी में आने वाली धान में नमी की मात्रा काफी अधिक है। इसके चलते किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम नहीं मिल पा रहा है। मार्केट कमेटी सचिव बलवान सिंह ने बताया कि इस समय आनाजमंडी में 1509 किस्म के अलावा कुछ मात्रा में पीआर किस्म की धान बिकवाली के लिए आ रही है। इस समय आ रही धान में काफी नमी की मात्रा है। 1509 किस्म की धान 2300 रुपए प्रति क्विंटल से लेकर 2581 तक बिक रहा है। जबकि पीआर किस्म का धान 1600 से 1800 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। उन्होंने कहा कि किसान जल्द बाजी के चक्कर में नमी युक्त धान मंडी में न लेकर आए। इसमें उनका ही नुकसान है। सुखा व साफ सुथरा धान ही बिकवाली के लिए लेकर आए ताकि किसानों को अपना धान बेचने में परेशानी न झेलनी पड़े।

मार्केट कमेटी सचिव बलवान सिंह ने बताया कि मार्केट कमेटी के अंतर्गत आने वाली ठोल, झांसा व कस्बे की अनाजमंडियों में धान खरीद को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। तीनों मंडियों में पानी, सफाई, बिजली के अलावा लाइटों को प्रबंध कर दिया गया है। आढ़तियों को करेट और तिरपाले रखने के लिए बोल दिया गया है, ताकि खराब मौसम में मंडी में पहुंची किसानों की फसल को बचाया जा सके। सरकार के आदेश आते ही सरकारी समर्थन मूल्य पर धान की खरीद शुरू कर दी जाएगी।

मंडी में शेड के नीचे खाद्य आपूर्ति विभाग ने लगा रखी है गेहूं

बता दें कि अनाजमंडी में धान का सीजन शुरू हो चुका है। हालांकि अभी काफी कम धान की फसल मंडी में बिकवाली के लिए आ रही है, लेकिन कुछ ही समय के बाद अनाजमंडी में आवक में खासी वृद्धि हो जाएगी। अनाजमंडी में तीन शैडों में से दो शेडाें में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अपनी गेहूं लगा रखी है। इसके अलावा अनाजमंडी में ही दो अन्य स्थानों पर विभाग का गेहूं पड़ा हुआ है। ऐसे में किसानों को धान डालने के लिए खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों की फसल को भीगने से बचाने व सुरक्षित रखने के लिए ही शेड बनाए गए थे, लेकिन अब इन शेडों का इस्तेमाल सरकारी एजेंसी ने गेहूं स्टॉक करने में किया हुआ है। किसानों का कहना है कि धान के सीजन में उनको अपनी फसल अनाजमंडी की सड़कों पर डालनी पड़ेगी। ऐसे में बरसात के आने पर सड़कों पर पड़ा धान बहकर नालों में चला जाता है। जबकि शेड के नीचे वही धान सुरक्षित रहता है। वहीं विभाग के इंस्पेक्टर सुशील कंसल ने बताया कि इसके बारे में डीएम को लिखकर दिया जा चुका है। आदेश आने पर ही गेहूं का उठान कर दिया जाएगा।

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