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पंकज से प्ररित हो 20 से ज्यादा लड़कियां बनवा चुकी लाइसेंस

एक वर्ष पहले
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13 वर्षों के बाद भी सरकार ने नहीं दी पक्की नौकरी


2007 में प्राप्त किया था हैवी लाइसेंस


खंड ऐलनाबाद के गांव मेहनाखेड़ा में भागीरथ गरवा के घर पैदा हुई पंकज देवी को बपचन से ही पिता के साथ ट्रैक्टर चलाने का शौक पैदा हुआ। ट्रैक्टर चालक बनने के बाद वह जीप कार अन्य वाहन चलाना सीख गई। ड्राइवरी के शौक को पूरा करते करते उसने हरियणा में सबसे पहले हैवी लाइसेंस की परीक्षा पास करके पहली महिला चालक बनने का गौरव हासिल कर लिया। 2007 में अनुबंध के आधार पर राजकीय महिला कॉलेज की बस चालक के रूप में नौकरी मिली। तब से लगातार पंकज महिला कॉलेज की बस चलाती आ रही है।

 जज्बे को सलाम

सुरक्षा के साथ सुरक्षित सफर की भी गारंटी देती है पहली बस ड्राइवर पंकज

पंकज देवी 20 गांव से छात्राएं कॉलेज लेकर आती है। पंकज देवी ने बताया कि शुरू में जब बस चलाना किया तो उसने देखा की कुछ शरारती किस्म के युवक बस का पीछा करते हैं। यह सब देखकर सबक सिखाने की जिम्मेदारी ठानी, क्योंकि बस चालक वह खुद है। ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा करना भी उसकी जिम्मेदारी है।

इसलिए किसी प्रकार की चिंता की बात नहीं। दरअसल गांव मेहनाखेड़ा की बेटी पंकज देवी पिछले 13 साल से राजकीय कॉलेज की बस चला रही है और उसे राज्य की पहली बस चालक होने का भी गौरव प्राप्त है। फिर भी उसकी एक पीड़ा यह है कि इतने लंबे अनुभव के बाद भी सरकार ने उसे अभी तक सरकारी चालक के तौर पर पक्का नहीं किया है। पंकज देवी को सिर्फ तब तक वेतन मिलता है जब तक कॉलेज लगता है।

ऐसे में पंकज का कहना है कि मुश्किल से 6 महीने का ही वेतन प्राप्त हो पाता है। एक परिवार चलाने के लिए यह काफी कम है। पंकज बताती है कि उसे जिला प्रशासन से लेकर सरकार भी कई बार सम्मानित कर चुकी है, मगर उसकी मेहनत और लगन के बाद भी उसे अभी तक चालक के तौर पर पक्का नहीं किया गया है। वह फिर भी छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा के लिए 13 साल से बस चला रही है। उसे भरोसा है कि उसकी मांग सरकार पूरी करेगी और उसे सरकारी नौकरी मिलेगी।

जिला की अन्य लड़कियों ने प्रेरणा ली। वे भी ड्राइवरी के शौक को पूरा करते हुए अपना कैरियर चुनने की ओर चल पड़ी। इस प्रकार आज 20 से अधिक छात्राएं जिला में हैवी लाइसेंस बनवा चुकी है।

रीब 13 साल से छात्राओं को गांव से शहर तक कॉलेज में पहुंचाने वाली प्रदेश की पहली महिला बस चालक पंकज देवी छात्राओं को सुरक्षित सफर के साथ साथ सुरक्षा की भी गारंटी देती है। ग्रामीण आंचल से शहर में पढने वाली लड़कियों के माता पिता भी इस बात को लेकर निश्चित हो जाते हैं कि उनकी बेटी जिस बस में बैठकर कॉलेज जाती है। वह बस पंकज देवी चलाती है।

इसलिए किसी प्रकार की चिंता की बात नहीं। दरअसल गांव मेहनाखेड़ा की बेटी पंकज देवी पिछले 13 साल से राजकीय कॉलेज की बस चला रही है और उसे राज्य की पहली बस चालक होने का भी गौरव प्राप्त है। फिर भी उसकी एक पीड़ा यह है कि इतने लंबे अनुभव के बाद भी सरकार ने उसे अभी तक सरकारी चालक के तौर पर पक्का नहीं किया है। पंकज देवी को सिर्फ तब तक वेतन मिलता है जब तक कॉलेज लगता है।
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