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जिला अस्पताल में मरीजों को नहीं मिल रही पूरी दवाई, चीफ फार्मासिस्ट का तर्क- बजट कम होने से हो जाती है समस्या

Kaithal News - सरकार व स्वास्थ्य विभाग के सख्त आदेशों के बावजूद जिला नागरिक अस्पताल में ओपीडी में आने वाले मरीजों को बाहर से दवाई...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:06 AM IST
Kaithal News - haryana news patients are not getting complete medicines in district hospital chief pharmacist argues problem becomes due to low budget
सरकार व स्वास्थ्य विभाग के सख्त आदेशों के बावजूद जिला नागरिक अस्पताल में ओपीडी में आने वाले मरीजों को बाहर से दवाई खरीदनी पड़ती है। ओपीडी में आने वाले हर दूसरे मरीजों को पूरी दवाइयां नहीं मिल पाती हैं। मरीजों को प्राइवेट फार्मेसी से दवाइयों को खरीदने के लिए 100 से लेकर 500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। कई बार यह राशि इससे भी ज्यादा होती है। अस्पताल में अक्सर चमड़ी व एलर्जी की दवाई जो बाहर बहुत महंगी मरीजों नहीं मिल पाती हैं। 10 से 12 एंटीबॉयोटिक में से सिर्फ एक या दो एंटीबॉयोटिक मिलती हैं। डाॅक्टर द्वारा खास तरह की एंटीबॉयोटिक दवा लिखने पर बाहर से खरीदना पड़ता है, हड्डियों के मरीजों को दर्द कम करने में सहायक बाम या जैल आदि कभी नहीं मिल पाते, खांसी की दवा अक्सर नहीं मिल पाती है व हार्ट व शुगर के मरीजों को भी पर्याप्त दवा नहीं मिल पाती है।

कैथल| सिविल अस्पताल में दवाइयां लेने के लिए लाइन में खड़ी महिलाएं।

दवाई नहीं समझ पाते ट्रेनिंग करने वाले छात्र

मरीजों ने बताया कि कई बार तो इसलिए भी दवाई नहीं मिल पाती है, क्योंकि अंदर दवाई देने के लिए विभिन्न संस्थानों से ट्रेनिंग पर आए छात्राें को डाॅक्टर की लिखी दवा का साल्ट व भाषा ही समझ में नहीं आती है। ये छात्र ये बताने की बजाय की उन्हें समझ नहीं आ रहा, मरीज को दवाई बाहर से खरीदने की सलाह दे देते हैं।

केस एक

जााखौली के पवन ने बताया कि प|ी गर्भवती है। डाॅक्टर ने 5 दवाइयां लिखी थी, जिनमें से एक पीने की और एक खाने की दवाई नहीं मिल पाई है। उन्हें ये महंगे दामों पर बाहर से खरीदनी पड़ेंगी। दवाइयों की कीमत 200 रुपए से ज्यादा है।

गांव किठाना निवासी जोगिंद्र ने बताया उन्हें घुटनों में दर्द रहता है। डाॅक्टर ने एक कैप्सूल लिखता है जो अस्पताल से कभी नहीं मिलता है। मजबूरी में उन्हें बाहर से खरीदना पड़ता है। इसके अलावा उनकी हार्ट की दवा भी चलती है। अक्सर हार्ट की उन्हें पूरी दवाई नहीं मिल पाती हैं।

केस चार


केस दो

गांव चंदाना से आई महिला सरोज को एड़ी में सूजन व दर्द रहता है। डाॅक्टर ने जो दवाई लिखीं हैं उनमें से एक नहीं मिली है जो बाहर से खरीदनी पड़ेगी।

गांव भाणा निवासी संजय सिंह ने खांसी बुखार की शिकायत के बाद मेडिसिन की ओपीडी में दिखाया। डाॅक्टर ने खांसी की पीने की दवाई सहित पांच दवाइयां लिखी जिनमें चार तो अंदर से मिल एक नहीं मिली।

केस पांच

केस तीन

गांव बालू निवासी युवक राजेश ने बताया कि उन्हें पेशाब में जलन रहती है । डाॅक्टर ने तीन दवाइयां लिखी, जिनमें से दो तो मिल गई एक नहीं मिली है। अब इसको बाहर से खरीदना पड़ेगा।

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