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चिकित्सकों को गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग जांच न करने का दिया निर्देश
सिविल सर्जन कार्यालय में बुधवार को सरकारी व प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों के प्रभारी डाॅक्टर, ऑपरेटर व मालिकों की पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डाॅ. अश्वनी कुमार आहुजा ने की।
वर्कशॉप में सिविल सर्जन ने बताया कि पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट 1994 के तहत जिला करनाल में अब तक 146 अल्ट्रासाउंड, ईकोकाडियोग्राफी, एमआरआई तथा सीटी स्कैन केंद्रों की रजिस्ट्रेशन की जा चुकी है, जिसमें से 86 अल्ट्रासाउंड, ईकोकाडियोग्राफी, एमआरआई व सीटी स्कैन केंद्र चालू हालत में हैं, शेष केंद्र बंद हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्कशॉप में 53 केंद्रों के ओनर, डॉक्टर व ऑपरेटरों ने भाग लिया। जिसमें डाॅ. नरेश करडवाल, उप-सिविल सर्जन (पीएनडीटी) करनाल ने पीएनडीटी एक्ट के सेक्शन व रूल्स बताते हुए अल्ट्रासाउंड केंद्र की रजिस्ट्रेशन के लिए किन-2 दस्तावेजों की आवश्यकता होती है तथा उनकी रिपोर्ट देने के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने जिले के अंदर सभी चिकित्सकों को गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग जांच न करने तथा कन्या भ्रूण हत्या न करने के संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिला करनाल का लिंग अनुपात जोकि वर्ष 2010 में 834 था, जो बढ़कर अक्टूबर 2019 में 908 हो गया था। वर्तमान में लिंगानुपात में 1000 लड़कों के पीछे लड़कियों की संख्या 900 से अधिक है, जो राष्ट्रीय अनुपात से ज्यादा है। इस मौके पर सिविल सर्जन करनाल ने सभी केंद्रों के डॉक्टर, ऑपरेटर व ओनर से अपील करते हुए गर्भ में पल रहे बच्चे की लिंग जांच न करने व कन्या भ्रूण हत्या न करने बारे शपथ भी दिलाई।