सरस्वती तीर्थ का 14 लाख लीटर जल 14 घंटे में साफ करेगा प्लांट

Kurukshetra News - 27 से 29 जनवरी तक सरस्वती तट पर अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में आने वाले श्रद्धालु अब सरस्वती तीर्थ में स्वच्छ जल...

Jan 16, 2020, 08:30 AM IST
Pehowa News - haryana news plant to clean 14 lakh liters of saraswati shrine in 14 hours
27 से 29 जनवरी तक सरस्वती तट पर अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में आने वाले श्रद्धालु अब सरस्वती तीर्थ में स्वच्छ जल में आचमन कर सकेंगे। तीर्थ के पानी को शुद्ध करने के लिए लुधियाना की मां सरस्वती विकास ट्रस्ट की ओर से करीब 40 लाख रुपये का खर्च करके सरस्वती तीर्थ पर जल शुद्धिकरण यंत्र लगाया जा रहा है। महोत्सव से पहले प्रोजेक्ट का शुभारंभ किए जाने की उम्मीद है। जीर्णोद्धार में लगी लुधियाना मां सरस्वती विकास ट्रस्ट के चेयरमैन जगदीप सिंहल, दीपक शर्मा, आशीष चक्रपाणी, एडवोकेट योगेश दत्ता, रवि शर्मा, अरुण ठुकराल, दिनेश तिवारी व ट्रस्ट के महासचिव मनोज तिवारी आदि ने बताया कि पानी साफ करने का यह प्लांट एक लाख लीटर पानी को एक घंटे में ही फिल्टर करने की क्षमता रखता है। इस प्रोजेक्ट के लगने से सरस्वती तीर्थ का पूरा जल एक दिन में फिल्टर किया जा सकता है। सरस्वती तीर्थ में करीब 14 लाख लीटर जल है जिसे यह जल शुद्धिकरण यंत्र मात्र 14 घंटे में ही फिल्टर कर देंगा। उन्होंने बताया कि उनकी ट्रस्ट द्वारा अभी तक सरस्वती तीर्थ के जीर्णोद्धार के लिए तीन करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि खर्च चुकी है जिसे सरस्वती तीर्थ पर लाइटें, तीर्थ में मिट्टी भरकर उसके तल को पक्का करना, तीर्थ पर पत्थर लगाना व शौचालय का निर्माण कराना शामिल है।

एक घाट का पानी साफ होकर दूसरे में पहुंचेगा | महासचिव मनोज तिवारी ने बताया कि जल शुद्धिकरण यंत्र को पुराने जल शुद्धिकरण यंत्र के स्थान पर लगाया जा रहा है। यह जल शुद्धिकरण यंत्र वाल्मीकि घाट से सीधे जल को भरेगा। जिसे फिल्टर करने के बाद उसे महिला घाट में छोड़ेगा। जहां से बहकर फिर यह जल वाल्मीकि घाट की ओर से चला जाएगा और वहां से फिर से यह सफाई के लिए यंत्र के बीच से गुजरेगा।

अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव से पूर्व 40 लाख में तीर्थ पर जल शुद्धिकरण यंत्र लगाएगा सरस्वती विकास ट्रस्ट

2012 में लगा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट हुआ फेल

2012 में उस समय की कांग्रेस सरकार में करीब 67 लाख की लागत से जल शुद्धिकरण यंत्र लगाया गया था जिसकी क्षमता एक घंटे में 10 हजार लीटर पानी को फिल्टर करने की थी। यह तीर्थ के पानी को फिल्टर करने में एक सप्ताह से भी ज्यादा का समय लेता था। जो कुछ ही समय के बाद ठप होकर रहा गया और यह केवल दिखावे के लिए तीर्थ के तट पर स्थापित है। कांग्रेस सरकार द्वारा 10 हजार लीटर प्रति घंटे की क्षमता का उपकरण 67 लाख में खरीदना और संस्था द्वारा इससे 10 गुना अधिक क्षमता एक लाख लीटर प्रति घंटा काम करने वाला उपकरण आधे दाम में खरीदना उस समय की खरीद व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। इसके बाद साल 2014 में तत्कालीन कांग्रेस की सरकार में ही गांव झांसा से पाइप लाइन प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी। लेकिन मौजूदा स्थिति में इस प्रोजेक्ट से तीर्थ को निरंतर जल नहीं मिल रहा है। केवल समय समय पर तीर्थ में जल भरा जाता है।

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