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एसडीएम के अादेश पर पंचायती रिकॉर्ड लेने पहुंची थी पुलिस, सरपंच के घर पर लगा था ताला
सरस्वतीनगर के पूर्व सरपंच मोहित की मुश्किलें सरपंची जाने के बाद भी कम नहीं हो रही। सरपंची जाने के बाद अब वे पंचायती रिकॉर्ड देने को तैयार नहीं है।कार्यवाहक सरपंच राकेश कुमार से लेकर बीडीपीओ तक ने रिकॉर्ड हैंडओवर करने को कहा लेकिन नहीं किया। इस पर अब पूर्व सरपंच से रिकाॅर्ड लेने के लिए अधिकारियों को पुलिस का सहारा लेना पड़ रहा है। एसडीएम ने सर्च वारंट जारी कर आदेश दिए कि बीडीपीओ पुलिस को साथ लेकर पूर्व सरपंच से पंचायती रिकॉर्ड हासिल करें। जब बीडीपीओ पुलिस को लेकर पूर्व सरपंच के घर गए तो वहां ताले लगे मिले। पुलिस के वापस आने के बाद ताले खुल गए। अब दोबारा से पूर्व सरपंच के घर पर पुलिस लेकर टीम जाएगी और वहां से रिकॉर्ड कब्जे में लिया जाएगा। सरपंच राकेश कुमार का कहना है कि मोहित रिकाॅर्ड नहीं देना चाहता इसलिए घर पर ताला लगाकर फरार हो गया था। वह अंडरग्राउंड हो गया है। उधर, मोहित का कहना है कि जब टीम उनके घर पर आई थी, उस दिन उनका पूरा परिवार यमुनानगर में सत्संग में गया हुआ था। छप्पर थाना प्रभारी जगबीर सिंह ने बताया कि पुलिस की टीम पूर्व सरपंच के घर गई थी, लेकिन वहां पर काेई नहीं मिला। इससे अधिकारियों की टीम के साथ अब दोबारा वे वहां पर जाकर रिकॉर्ड व सामान कब्जे में दिलाया जाएगा।
चेकबुक तक मोहित के पास, कई गलियों के निर्माण में गड़बड़ी की आशंका ः सरपंच राकेश कुमार ने बताया कि मोहित ने कोई भी रिकॉर्ड उन्हें नहीं दिया। पंचायत अकाउंट की चेकबुक तक उसके पास है। वहीं पंचायत का अन्य सामान भी उसी के कब्जे में है। इससे वे विकास कार्य के लिए पैसे नहीं निकलवा पा रहे। वहीं जो काम हुए हैं, उनकी पेमेंट नहीं दे पा रहे। इसके साथ ही पता चला है कि एक गली एक लाख रुपए से सिर्फ कागजों में ही बनाई गई। वहीं कई गलियों को पब्लिक हेल्थ विभाग फंड से बनवाया है लेकिन उन्हें पंचायत के फंड से दिखाया गया। इस तरह से उन्हें गड़बड़ियों की आशंका है। शायद इसलिए रिकॉर्ड नहीं दिया जा रहा।
कभी दोनों पक्ष एक होते थे, लेकिन विवादों से दोनों के बीच हुई बड़ी खाई : मोहित कुमार चुनाव जीतकर सरपंच बने थे। तब पंच राकेश कुमार और सतनाम सिंह उनके साथ होते थे।
दोनों ने एक-दूसरे को स्पोर्ट किया था लेकिन चुनाव के कुछ समय बाद ही दोनों पक्षों के बीच खटास पैदा हुई। मोहित ने अपने साथियों से पंच सतनाम सिंह पर हमला करा दिया। इससे दोनों के बीच खाई और बढ़ गई। मोहित और उसके कुछ साथियों को सतनाम सिंह पर जानलेवा हमले के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। यह मामला भी हाईकोर्ट तक गया।
एससी सर्टिफिकेट असली होने की याचिका हाईकोर्ट में हो चुकी डिसमिस : मोहित कुमार ने खुद को एससी बताते हुए चुनाव लड़ा था। इसके लिए उन्होंने एससी का सर्टिफिकेट भी नामांकन में लगाया था। चुनाव जीतने के बाद जब उनके सर्टिफिकेट की जांच हुई तो वह गलत पाया गया। वे इस मामले को लेकर हाईकोर्ट चले गए थे। 9 जनवरी को उनकी याचिका हाईकोर्ट की डबल बेंच में डिसमिस हो गई थी इसलिए उनकी कुर्सी चली गई। इसके बाद तीन फरवरी को बहुमत के लिए चुनाव हुआ। 20 पंचाें में से 13 ने पंच राकेश के पक्ष में वोटिंग की। इससे अब राकेश गांव के सरपंच हैं।
राकेश ने हमें पूरा रिकॉर्ड नहीं दिया : मोहित
पूर्व सरपंच मोहित का कहना है कि राकेश इससे पहले भी कार्यवाहक सरपंच रहा। उसने तबका उन्हें पूरा रिकॉर्ड नहीं दिया। चेकबुक तक नहीं दी। इससे वे रिकाॅर्ड पूरा नहीं कर पा रहे। राकेश अगर पहले का रिकाॅर्ड पूरा दे देता है तो वे भी रिकाॅर्ड पूरा कर देंगे। राकेश को कई बार लेटर लिखकर रिकार्ड मांगा था। उनका कहना है कि उनकी जो याचिका हाईकाेर्ट में डिसमिस हुई थी, उसका ऑर्डर पांच मार्च को आया है। ऑर्डर आए बिना ही उन्हें अधिकारियों ने बर्खास्त कर दिया जोकि गलत है। वे इसे लेकर भी हाईकाेर्ट गए हुए हैं। वहीं राकेश पर गबन का केस दर्ज है। उसे लेकर भी कुछ पंच को कोर्ट गए हुए हैं।