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पुलिस की भूमिका पर सवाल-पांच बैंकों से फर्जीवाड़ा कर 4 करोड़ का लोन लेने वाले गिरोह का 4 माह भी सुराग नहीं

Kaithal News - तीन प्रॉपर्टी पर फर्जीवाड़ा कर पांच बैंकों से चार करोड़ से अधिक का लोन लेने वाले लक्ष्मण कॉलोनी निवासी प्रवीण...

Bhaskar News Network

Sep 16, 2019, 08:20 AM IST
Pai News - haryana news question on the role of the police 4 months of gang taking loan of 4 crores from five banks fraudulently not even clue
तीन प्रॉपर्टी पर फर्जीवाड़ा कर पांच बैंकों से चार करोड़ से अधिक का लोन लेने वाले लक्ष्मण कॉलोनी निवासी प्रवीण शर्मा सहित गिरोह के 10 से अधिक सदस्यों पर विभिन्न बैंकों की ओर से पांच एफआईआर दर्ज करवाए 4 माह बीत चुके हैं। अभी तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस नहीं कर पाई। इससे पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। बैंक अधिकारी भी पुलिस पर ढीली कार्रवाई का आरोप लगा रहे हैं।

गिरोह के मुख्य सरगना संजीव कुमार और प्रवीण शर्मा ने जिन प्रॉपर्टी पर शहर के बैंकों से लोन लिया था भास्कर उन प्रॉपर्टी तक पहुंचा। लक्ष्मण कॉलोनी में नाले के साथ करीब 140 गज के मकान को ओबीसी ने सील किया है। दोनों गेट पर ओबीसी ने ताला लगा सील लगाई है, साथ में नोटिस भी चस्पा किया है। संजीव कुमार के कुबेर कॉलोनी स्थित उस मकान पर भी भास्कर पहुंचा, जिसे खरीदने के नाम पर प्रवीण शर्मा व गिरोह ने कई बैंकों से लोन लिया। करीब 150 गज के इस मकान को ओबीसी नीलाम कर चुका है। इस माकन में अब बैंक से खरीदने वाला परिवार रह रहा है। उनका कहना है बैंक से नीलामी पर यह मकान खरीदा है। वे न तो प्रवीण शर्मा को जानते हैं और न ही संजीव को।

रिकॉर्ड जुटाने में पुलिस लगी है| शहर के पांच बैंकों के साथ चार करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा करने वाले 10 से अधिक गिरोह के सदस्यों को चार माह से अधिक समय बीतने और पांच एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस इन तक नहीं पहुंच पाई।

तीन मकान-कीमत एक करोड़ से भी कम-चार करोड़ से अधिक का लोन| मकान खरीदने के नाम पर बैंक ऑफ बड़ोदा से अपने साले के कागजात का प्रयोग कर 25 लाख का लोन लेने वाले कुबेर कॉलोनी फरीदकोट हाउस निवासी संजीव प|ी सहित पुलिस पांच से अधिक लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। बैंकों के साथ फर्जीवाड़े के इस खेल में 10 से अधिक लोगों का गिरोह सक्रिय है।

अलग-अलग बैंक से अलग-अलग लोगों ने इन तीन प्रॉपर्टी का एक-दूसरे के नाम ब्याना करवा चार करोड़ से अधिक का लोन लिया है। जिन तीन प्रॉपर्टी पर यह लोन लिया गया, उन तीनों को मिलाकर भी कीमत एक करोड़ से अधिक नहीं बनती। गिरोह के सदस्यों ने इलाहाबाद बैंक से एक करोड़ के करीब, आंध्रा बैंक से भी एक करोड़, ओबीसी से 36 लाख, इंडियन बैंक से 18 लाख, बैंक ऑफ बड़ोदा से 50 लाख, पीएनबी की दो शाखाओं से 50 लाख के करीब लोन तीन प्रॉपर्टी को अलग-अलग व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री दिखा लिया है। इस खेल में थानेसर तहसील की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। एडवोकेट प्रवीण चोपड़ा ने बताया आरोपियों ने छह माह के दौरान इन तीनों मकान की 20 से अधिक बार एक-दूसरे के नाम रजिस्ट्री करवाई।

तहसील कार्यालय में बिना इंतकाल चढ़ाए रजिस्ट्री होती रही। तहसील कार्यालय की ओर से रिकॉर्ड तक नहीं जांचा गया। जबकि रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी पिछले मालिक के नाम ही रही। बैंकों से फर्जीवाड़ा करने को बिना इंतकाल चढ़ाए आरोपी आपस में ही एक-दूसरे के नाम प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवा बैंकों से लोन लेते रहे। इसी तरह लक्ष्मण कॉलोनी वासी प्रवीण का 120 गज के करीब मकान है। इस मकान में उसने परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम ब्याना करवा बैंकों से लोन लिया। इसके बाद प्रवीण की मां ने फरीदकोट हाउस वासी संजीव कुमार के नाम ब्याना किया। फिर संजीव ने बैंक से उक्त प्रॉपर्टी को खरीदने का लोन लिया। इस तरह इस गिरोह में दीदार नगर निवासी मुनीष, संजीव की प|ी, दोनों साले और साले की प|ी भी शामिल है।

कुरुक्षेत्र-बैंकों के साथ फर्जीवाड़ा-लक्ष्मण कॉलोनी स्थित मकान के गेट पर बैंक ने लगाई सील।

दूसरे बैंक के जांच अधिकारी का जवाब-चल रही जांच

बैंक ऑफ बड़ोदा को करीब 55 लाख की चपत लगाने वाले गिरोह के खिलाफ मार्च व मई में दो एफआईआर धोखाधड़ी की दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। सुभाष मंडी चौकी से जांच अधिकारी एएसआई पवन कुमार का कहना है, एक आरोपी मुनीष के मामले में बैंक के साथ पैसे को देने को लेकर समझौते की बात चलने की बात बैंक ने कही है। दूसरी एफआईआर में आरोपियों की तलाश में पुलिस लगी है। आरोपी फिलहाल भूमिगत हैं।

जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के जवाब-लंबी प्रक्रिया

इंडियन बैंक को करीब 65 लाख की चपत लगाने वाले गिरोह पर एफआईआर दर्ज हुए तीन माह से अधिक समय बीत चुका है। मामले में अभी तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई। सुभाष मंडी चौकी से जांच अधिकारी एएसआई लाभ सिंह ने कहा कि धोखाधड़ी के मामलों में रिकॉर्ड जुटाने में कुछ समय लगता है। फिलहाल बैंक से रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है। इसके आधार पर ही कार्रवाई होगी।

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