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शिवांश की उम्रकैद पर राजेश बोला- अब मिलेगी मेरी पत्नी की आत्मा को शांति
20 जनवरी 2018 को थॉपर कॉलोनी स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल की प्रिंसिपल रितू छाबड़ा की गोलियां मारकर हत्या करने वाले छात्र शिवांश को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है गई। इस मामले में कोर्ट ने उसके पिता रणजीत को 25 फरवरी 2020 को बरी कर दिया था। छात्र शिवांश को सजा सुनाने से पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की बात सुनी।
कोर्ट ने सुबह 11 बजे दोनों पक्षों को सुनने के बाद शाम चार बजे सजा सुनाई। यह केस में सुनवाई से लेकर सजा तक तीन जज की कोर्ट में चला। पहले एडीजे पूनम सुनेजा की कोर्ट में सुनवाई हुई। उनका फैमिली कोर्ट में ट्रांसफर के बाद एडीजे पायल बंसल की कोर्ट में सुनवाई हुई और दोषी करार दिया गया। अगले ही दिन एडीजे पायल बंसल की कोर्ट को पोक्सो की स्पेशल कोर्ट बना दिया गया। इससे केस क्राइम अंगेस्ट वूमन की स्पेशल कोर्ट नेहा नोहरिया में भेजा गया। वीरवार को उन्होंने सजा सुनाई।
शिवांस अपने बचाव में कुछ नहीं कह पाया, जेल में रहते हुए कर रहा पढ़ाईः कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि छात्र शिवांश अपने बचाव में कुछ नहीं कह पाया है। इससे लगता है कि वह दोषी है। इस पर कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। हालांकि शिवांश ने कोर्ट में कहा कि वह सेकेंड ईयर का स्टूडेंट है। उसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए उसे सजा सुनाते हुए कोर्ट नरमी रखे। उधर, सजा सुनाने के दौरान दोषी छात्र शिवांश सिर नीचे कर खड़ा रहा। उसने वहां पर जो भी बात की अपने वकील से ही की। उधर, उसके पिता रणजीत का कहना है कि वे इस मामले को लेकर अपील में जाएंगे। उनके बेटे और उनके परिवार का कभी कोई क्रिमिनल रिकाॅर्ड नहीं रहा है। पिता की रिवाॅल्वर से शादी समारोह में फायरिंग करने और कार में रिवाॅल्वर लेकर घूमने की वीडियो शिवांश पर उल्टी पड़ी क्योंकि पीड़ित पक्ष ने इन वीडियो को कोर्ट में रखा था। बता दें शिवांश ने अपने पिता की रिवाॅल्वर लेकर कई वीडियो बनाई हुई थी जो किसने सोशल मीडिया पर भी अपलोड की थी।
पिता इसलिए बरी हुआः इस मामले में पुलिस ने पिता को आर्म्स एक्ट में आरोपी बनाया था। एसपी ने वारदात के दिन पत्रकारवार्ता करते हुए कहा था कि शिवांश ने रोड से अलमारी का लॉकर तोड़कर अपने पिता की लाइसेंसी रिवाॅल्वर निकाली थी जबकि चार्जशीट में आईओ ने कहा था कि अलमारी खुली थी। इससे शिवांश के पिता को फायदा मिला और कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। शिवांश का पिता 8 माह तक जेल में रहा था हाई कोर्ट से उसे जमानत मिली थी। अभियोजन पक्ष से उप जिला न्यायवादी सुरजीत आर्य ने बताया इस मामले में हमने पूरे फैक्ट कोर्ट के सामने रखे। इससे प्रिंसिपल को गोली मारने वाले शिवांश को सजा हो पाई।
पीड़ित पक्ष के एडवोकेट अविनाश चड्ढा का कहना है कि शुरू से भी इस केस को देख रहे थे। उन्हें खुशी है कि वे पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाए। एक गवाह के मुकरने के बाद भी हम सजा दिलाने में कामयाब रहे।
शिवांश भाग जाता तो शायद पकड़ा ही न जाता : राजेश
मेरी प|ी रितू छाबड़ा ने कभी किसी का बुरा नहीं किया। फिर भी उनकी हत्या कर दी गई। दो साल तक केस की सुनवाई कोर्ट में चली। हर सुनवाई पर मैं कोर्ट आता था। कर्म सिंह ने शिवांश को गोली मारकर भागते समय पकड़ा था, लेकिन वह कोट में आकर मुकर गया, लेकिन मैं उसका भी धन्यवाद करता हूं कि उन्हीं की वजह से शिवांश मौके पर पकड़ा गया। लेकिन मौके से भाग जाता तो शायद वह बाद में पकड़ा ही नहीं जाता। मुझे कोर्ट से न्याय की उम्मीद थी, कोर्ट ने शिवांश को उम्रकैद दी है, इससे मेरी प|ी की आत्मा को अब शांति मिलेगी। हालांकि मैं फांसी की सजा की मांग कर रहा था। क्योंकि शिवांश ने तो हत्या की है, इसलिए उसे तो सजा मिलना जरूरी थी। लेकिन मेरे परिवार ने कौन सा गुनाह किया, जिससे मैं सजा भुगत रहा हूं। दोनों बेटे मां को हर पल याद करते हैं। घर में अब खाना तब ही बनता है, जब मेड घर पर आती है।
जैसा प्रिंसिपल रितू छाबड़ा के पति राजेश छाबड़ा ने बताया।
{टीचर्स के बयान और शिवांश की भागते की सीसीटीवी फुटेज सजा में बने मुख्य आधार
\\\"मुझे शिवांश गोलियां मारकर भागा\\\'
प्रिंसिपल मर्डर | 20 जनवरी 2018 को स्वामी विवेकानंद स्कूल प्रिंसिपल रितु छाबड़ा की छात्र शिवांश ने गोली मारकर की थी हत्या
गुनहगार बेटे को छिपाने का प्रयास
कोर्ट से लाइव
एकलव्य ने गुरु के लिए अपना अंगूठा काटा और शिवांश ने अपनी प्रिंसिपल की हत्या कर दी
पीड़ित पक्ष
माफी देने वाला सजा देने वाले से बड़ा होता है
दोषी पक्ष
भास्कर न्यूज | यमुनानगर
प्रिंसिपल की हत्या को लेकर फैसले में कई मोड़ आए। इस मामले में मैथ टीचर कमलेश, कंप्यूटर टीचर संगीता के बयान और गोली मारकर स्कूल से भागते शिवांश की सीसीटीवी फुटेज मुख्य आधार बनी। टीचर कमलेश और संगीता ने पुलिस को बताया था कि जब प्रिंसिपल को गोलियां लगी थी, सबसे पहले वह मौके पर गईं थीं। उन्हें प्रिंसिपल ने बताया था कि उसे शिवांश गोलियां मारकर भागा है। दोनों टीचर इन बयानों पर कोर्ट में गवाह तक अड़ी रहीं। वहीं शिवांश को भागते समय पकड़ने वाले कर्म सिंह को प्रशासन ने बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित किया, लेकिन वह कोर्ट में जाकर बयानों से मुकर गया था। पहले उसने पुलिस को बयान दिए थे कि उसी ने शिवांश को पकड़ा, लेकिन कोर्ट में जाकर कहा कि उसने शिवांश को नहीं पकड़ा था। लेकिन जब पीड़ित पक्ष के वकीलों ने घटना के समय की उसकी वीडियो और मीडिया को दिए बयान की वीडियो सामने रखा तो चश्मदीद ही झूठा पड़ गया।
फैसले के बाद भावुक हुए राजेश छाबड़ा।
फैसले के बाद कोर्ट से बाहर निकलता शिवांश (मुंह को रूमाल से छिपाते हुए) को अपनी आड़ में छिपाने का प्रयास करते पिता रणजीत सिंह।
पीड़ित पक्ष के वकील यह रेयर केस है। इसमें सख्त से सख्त सजा दी जाए।
दोषी पक्ष के वकील यह रेयर केस नहीं है।
पीड़ित पक्षः अपनी ही प्रिंसिपल की गोली मारकर हत्या की गई है। समाज में गलत मैसेज गया है।
दोषी पक्षः छात्र की उम्र 18 साल 10 दिन थी। वह पूरी तरह से मैच्योर नहीं था। उससे गलती में हुआ।
पीड़ित पक्षः वह जुवेनाइल तो नहीं था। इसलिए सजा में नरमी भी न की जाए।
दोषी पक्षः माफी देने वाला बड़ा होता है, सजा देने वाले से।
पीड़ित पक्षः एकलव्य ने अपने गुरु को अपना अंगूठा काटकर दे दिया था और यहां शिष्य ने ही गुरु की जान ले ली। इसलिए इसे छोड़ा न जाए।
दोषी पक्षः सुधरने का एक मौका तो दिया जाना चाहिए। वह पढ़ रहा है।
पीड़ित पक्षः दोषी को सख्त सजा नहीं दी तो समाज में गलत मैसेज जाएगा इसलिए कोर्ट से अपील है कि सख्त सजा सुनाई जाए।