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रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने बिल्डर को दिए 10.5 प्रतिशत ब्याज दर से 13 करोड़ रुपए लौटाने के आदेश

Rewari News - हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी पंचकूला ने बावल औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-2 में आवासीय फ्लैट के लिए आवेदन...

Nov 21, 2019, 07:26 AM IST
Bawal News - haryana news real estate regulatory authority ordered to return rs 13 crore to builder at 105 percent interest rate
हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी पंचकूला ने बावल औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-2 में आवासीय फ्लैट के लिए आवेदन करने वाले शहर के ग्राहकों को बड़ी राहत दी है।

अथॉरिटी ने आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने वाले डेवलेपर्स को तय समय में फ्लैट नहीं देने पर सेवा दोषी मानते हुए ग्राहकों की लगभग वाद दायर करने वाले 19 ग्राहकों को 13 करोड़ रुपए की राशि 10.5 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए हैं। रेरा ने इस मामले में एचएसआईआईडीसी की भी कई स्तर पर नियमों में अवहेलना मानी है।

फिलहाल वाद दायर करने वाले ग्राहकों को राहत

अधिवक्ता हिमांशु राज ने बताया कि रेरा ने इस मामले में वाद दायर करने वाले केवल 19 ग्राहकों को भी यह पैसा लौटाने का आदेश दिया है। बिल्डर की तरफ से लगभग 150 ग्राहकों के लगभग 128 करोड़ रुपए कुल जमा किए हैं। यदि अन्य ग्राहकों को भी पैसा लेना है तो उनको अथॉरिटी में वाद दायर करना होगा। हालांकि इस फैसले के बाद अन्य ग्राहकों को भी अथॉरिटी में जाना तय माना जा रहा है।

एक माह के अंदर लौटानी होगी राशि

बावल औद्योगिक क्षेत्र में एचएसआईआईडीसी ने वर्ष 2006 में एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को लगभग 42 एकड़ जमीन आवंटित की थी। इस कंपनी ने आवासीय प्रोजेक्ट के लिए अपनी लीज डीड एक दूसरी कंपनी को देकर उसको भी इसमें पार्टनर बना लिया था। इसके बाद दोनों कंपनियों द्वारा यह आवासीय प्रोजेक्ट तैयार किया गया है जिसके तहत लगभग 150 से अधिक फ्लैट तैयार करने थे। वर्ष 2013 में बिल्डर की तरफ से आवासीय फ्लैट के लिए आवेदन निकाले थे जिसके तहत उन्होंने वायदा किया था कि 12 मंजिला तक फ्लैट बनाकर दिए जाएंगे। इसके अलावा यह प्रोजेक्ट 30 माह में पूरा हो जाएगा तथा बिल्डर को वर्ष 2016 में ये फ्लैट पूरी तरह से तैयार करने का आश्वासन दिया था। इस आवासीय योजना का कार्य 30 माह के अंदर पूरा किया जाना था लेकिन बिल्डर की तरफ से तय समय के बाद कोई काम नहीं किया गया। इसके बाद आवेदनकर्ताओं की तरफ से प्रशासन से लेकर उच्चाधिकारियों को शिकायत की लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। तत्पश्चात ग्राहकों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग की भी शरण ली जिस पर अभी सुनवाई चल रही है। इसी बीच शहर के 19 ग्राहकों ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की शरण ली जिसके बाद लगभग एक साल तक चली सुनवाई के बाद अथॉरिटी ने इस मामले में बिल्डर की तरफ से सेवा दोष मानते हुए एक माह के अंदर ग्राहकों की लगभग 13 करोड़ रुपए की राशि साढ़े 10 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। साथ ही प्राधिकरण ने बिल्डर को इस राशि के भुगतान से संबंधित अकाउंटेंट स्टेटमेंट भी देने के आदेश दिए हैं।

एचएसआईआईडीसी की भी कई स्तर पर लापरवाही

अथॉरिटी ने इस मामले में कंपनी को जमीन आवंटित करने वाली संस्था एचएसआईआईडीसी की भी कई स्तर पर लापरवाही मानी है। अधिवक्ता हिमांशु राज ने बताया कि बिल्डर को जमीन देने के बाद एचएसआईआईडीसी की भी जिम्मेदारी है वह शर्तों पर खरा नहीं उतरने वाली कंपनियों के खिलाफ कदम नहीं उठा रहा है। साथ ही जिस कंपनी के नाम जमीन आवंटित हुई उसके द्वारा दूसरी कंपनी को पार्टनर बना लिया गया है जिससे दोनों की जिम्मेदारी बराबर बनती है।

उपभोक्ता आयोग के साथ रेरा में भी कर सकते हैं शिकायत

इस मामले में पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता हिमांशु राज ने बताया कि रेरा की तरफ से दिया गया फैसला न केवल ग्राहकों के लिए न्याय है अपितु इस तरह से लोगों को छत देने के नाम पर उनके हितों से खिलवाड़ करने वालों के लिए भी सबक है। उन्होंने बताया कि अथॉरिटी ने अपने आदेश में वाद दायर करने वाले 19 ग्राहकों के 13 करोड़ रुपए साढ़े 10 प्रतिशत ब्याज के साथ देने के आदेश दिए हैं। हालांकि इस प्रोजेक्ट के लिए कुल राशि लगभग 128 करोड़ रुपए जमा हुई है। इन उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में भी वाद दायर किया है तथा इसमें नियम है कि ग्राहक इसके साथ रेरा में भी शिकायत कर सकते हैं।

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