संक्रांति पर्व दान-धर्म के लिए सबसे श्रेष्ठ अवसर: धीरज गिरी

Rewari News - रेवाड़ी | बुधवार को जिला के गांव गोकलपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। हवन का आयोजन मंदिर...

Jan 16, 2020, 08:35 AM IST
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रेवाड़ी | बुधवार को जिला के गांव गोकलपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। हवन का आयोजन मंदिर के महंत धीरज गिरी की 41 दिन की तपस्या के समापन पर किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। तत्पश्चात भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

बुधवार मकर संक्रांति के अवसर पर ही महंत धीरज गिरि के द्वारा की गई 41 दिन की तपस्या भी पूर्ण हुई। तपस्या पूर्ण होने और माघ माह और कृष्ण पक्ष की पंचमी पर कार्यक्रम किया। इस मौके पर धीरज गिरि ने कहा कि अध्यात्मिक गुरु की कृपा और उनके दिखाए मार्ग दर्शन का अनुपालन करते हुए ही 41 दिन की निराहार तपस्या का संकल्प लेकर जप-तप किया। यह बुधवार को बिना किसी बाधा के गुरु कृपा से पूर्ण हुआ। भारत की सनातन संस्कृति में धर्म,कर्म, हवन और दान का अपना ही विशेष महत्व है। यह पर्व पारिवारिक रिश्तों सहित संबंधों को प्रगाढ़ बनाने का पर्व है। प्रत्येक परिवार में छोटे सदस्य खासकर महिलाएं रिश्तों सहित आयु में अपने से बड़ों का श्रद्धानुसार उपहार भेट कर सम्मान करती हैं। प्राचीन शिव मंदिर के समक्ष हवन कुंड में सवा दो घंटे तक देवताओं का आह्वान कर उन्हें साक्षात मानकर श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित की।

रेवाड़ी में संक्रांति पर गांव गोकुलपुर के प्राचीन शिव मंदिर में हवन-यज्ञ करते धीरज गिरि महाराज और श्रद्धालु।

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