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हथलाना का शिवम 5वंे प्रयास में बना लेफ्टिनेंट, कहा- कड़ी मेहनत से ही मुकाम हासिल किया जा सकता है
मेहनत कर काेई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। शिवम ने कड़ी मेहनत कर यह कर दिखाया है। चार बार परीक्षा में असफल रहा, लेकिन हार नहीं मानी। हर बार असफलता के बाद ज्यादा ऊर्जा लगाकर तैयारी की अाैर सेना में लेफ्टिनेंट पद हासिल किया। शिवम ने बताया कि चार बार सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की ट्रेनिंग में असफलता प्राप्त मिली। जबकि कंबाइन डिफेंस सर्विस मैंने पास कर ली थी। लेकिन फिर भी लेफ्टिनेंट बनने की हिम्मत नहीं छोड़ी, क्योंकि ट्रेनिंग काफी मुश्किल थी। पहले दिन स्क्रीन टेस्ट लिया, जिसके बाद ऑफिसर बैठकर ग्रुप डिसक्शन, टॉस्क, नॉलेज चेक करवाना व विभिन्न प्रकार की गतिविधियांे से निकलना पड़ा। शिवम करनाल के गांव हथलाना का रहने वाला है। माैजूदा समय में परिवार मान काॅलाेनी में रहता है।
करनाल. गांव हथलाना के शिवम कुमार बने सेना में लेफ्टिनेंट अपने माता व पिता रमेश कुमार के साथ।
सैनिक स्कूल से शिक्षा प्राप्त करते समय सेना में जाने का देखा था सपना
शिवम का सैनिक स्कूल की नौवीं कक्षा से ही लेफ्टिनेंट बनने का सपना था। सैनिक स्कूल में सेना के बड़े-बड़े अधिकारी अाते हैं। अधिकारी युवाअाें काे सेना में जाने के लिए प्रेरित करते हैं, वहीं से प्रेरणाा लेकर लेफ्टिनेंट बनने का सपना देखता था। इंग्लिश से मास्टर डिग्री कर फाइनल परीक्षा से ग्रेजुएशन स्तर पर पहले कंबाइन डिफेंस सर्विस में पेपर पास किया। जिसके बाद सर्विस िसलेक्शन बोर्ड 7 दिन के टेस्ट में शिवम ने चार बार असफल रहा। लेकिन पांचवी बार में सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की ट्रेनिंग को पूरा किया। जिसके बाद उनका चयन 1 अप्रैल 2019 को ट्रेनिंग आॅफिसर ट्रेनिंग एकेडमी चेन्नई के लिए हुअा। जिसके बाद अब 7 मार्च 2020 को शिवम ने अपनी सेना ऑफिसर की ट्रेनिंग पूरी की।
पापा थे सेना में: उनके पिता रमेश कुमार वायुसेना से रिटायर्ड हैं। जो अभी हरियाणा शिक्षा विभाग में प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। शिवम ने बताया जब पापा सेना में थे मेरा भी सपना था कि मैं सेना में लेफ्टिनेंट बनूं।