आज से श्राद्ध शुरू, पितरों को तृप्त करने के लिए नियमानुसार तर्पण से घर मंे आएगी समृद्धि

Sonipat News - पितरों को याद करने और उनका तर्पण करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध के लिए 15 दिन का समय तय किया गया है। पितृ...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 09:06 AM IST
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पितरों को याद करने और उनका तर्पण करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध के लिए 15 दिन का समय तय किया गया है। पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा और आश्विन माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होते हैं। इस साल आश्विन प्रतिपदा 13 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो रहा है। इस बार 14 को प्रतिपदा और 15 सितम्बर को द्वितीया का श्राद्ध होगा और 28 सितम्बर को सर्व पितृ अमावस्या का श्राद्ध होगा। 16 को मध्याह्न तिथि न मिलने के कारण श्राद्ध नहीं होगा। पंडित राम कृष्ण पाठक ने बताया कि पितृपक्ष का मान प्रतिपदा से अमावस्या तक है। इस बार दशमी और एकादशी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन होगा।

विधान से पूजन से समृद्धि आती है

शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष में नियमानुसार विधान से पूजन और तर्पण करने से मान सम्मान में वृद्धि होती है। श्राद्धों में पूर्वज अपने वंशजों के घर आते हैं। ऐसे में उनके सत्कार से जीवन में और भी खुशहाली आती है। इसीलिए मान्यता है कि मीठा व पूर्वजों के पंसद का भोजन बनाने की परंपरा है। वहीं मान्यता है कि इसमें शुभ कार्य से भी बचना चाहिए। श्राद्ध को कई नामों से संबोधित किया जाता है।

दशमी और एकादशी का श्राद्ध एक ही दिन : पंडित ने बताया कि पितृपक्ष में दशमी और एकादशी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन होगा। क्योंकि 24 सितंबर, मंगलवार को सूर्योदय छह बजे होगा। दशमी तिथि दिन में 11.42 बजे तक व्याप्त रहेगी उसके बाद एकादशी लगेगी। इसलिए मध्य समय में दोनों तिथियों का योग होने से श्राद्ध एक ही दिन होगा।

पितृदोष दूर करने के लिए करें ये उपाय

पितृदोष दूर करने के लिए घर में गीता पाठ कराएं। अमावस्या को ब्राह्मण भोज कराना चाहिए। भोज में पूर्वजों की मनपसंद वस्तुएं बनाना चाहिए। घर में वर्ष में एक दो-बार हवन अवश्य कराना चाहिए। पानी में पितृ का वास माना गया है और पीने के पानी के स्थान पर उनके नाम का दीपक जलाएं। सुबह-शाम परिवार के सभी लोग मिलकर सामूहिक आरती करें। माह में एक या दो बार उपवास रखें। श्राद्धपक्ष में पीपल वृक्ष पर अक्षत, तिल व फूल चढ़ाकर पूजा करनी चाहिए।

श्राद्ध की तिथियां





इसी क्रम में 17 को तृतीया,











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