िपतरों को जल का तर्पण कर श्राद्ध पक्ष शुरू, सर्वपितृ अमावस्या पर होगा समापन

Jhajjar News - श्राद्ध पक्ष की शुरूआत शुक्रवार से हो गई। पारंपरिक लाेगाें ने सुबह अपने िपतराें काे जल चढ़ाकर तर्पण कर उनके प्रति...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:00 AM IST
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श्राद्ध पक्ष की शुरूआत शुक्रवार से हो गई। पारंपरिक लाेगाें ने सुबह अपने िपतराें काे जल चढ़ाकर तर्पण कर उनके प्रति श्रद्धा प्रकट की। कहा गया िक भाद्रपद माह की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक का समय श्राद्ध कर्म करने का सबसे उत्तम माना गया है। पूर्वजों को श्रद्धासुमन अर्पित करने का महापर्व है। पितृपक्ष का श्राद्ध, जो श्रद्धा से किया जाए उसे श्राद्ध कहा जाता है। श्राद्ध करने पर पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। पितृ पक्ष 28 सितंबर तक रहेगा। सिद्ध बाबा कांशीगिरि मंदिर के पंडित पवन कौशिक ने बताया कि हिंदू धर्म में परिवार के सदस्यों की मृत्यु के बाद उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए किए जाने वाले कर्म को पितृ श्राद्ध कहते हैं। पितृपक्ष के लिए गया की भूमि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ऐसी मान्यता कि गया में श्राद्ध से जीव की सद्गति होती है। श्राद्ध अथवा पितृ पक्ष में व्यक्ति जो भी पितरों के नाम से दान और भोजन कराते हैं, या उनके नाम से जो भी निकालते हैं, उसे पितर सूक्ष्म रूप से ग्रहण करते हैं। ग्रंथों में तीन पीढ़ियों तक श्राद्ध करने का विधान बताया गया है। कौशिक ने बताया कि पुराणों के अनुसार यमराज हर वर्ष श्राद्ध पक्ष में सभी जीवों को मुक्त कर देते हैं, जिससे वह अपने स्वजनों के पास जाकर तर्पण ग्रहण कर सकते हैं। श्राद्ध के समय यही अन्य सभी पूर्वजों के प्रतिनिधि माने जाते हैं। पितरों का श्राद्ध करने से वे प्रसन्न होते हैं।

श्राद्ध पक्ष में नए काम की शुरुआत नहीं होती

मान्यताओं के अनुसार, पितरों का श्राद्ध और पिंडदान करने आैर ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितरों की आत्माएं तृप्त होती हैं। इसके परिणाम स्वरूप कुल और वंश का विकास होता है। परिवार के सदस्यों को लगे रोग और कष्टों दूर होते हैं। इसमें नए काम की शुरूआत नहीं होती है।

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