किसी के माथे की बिंदिया मेरा इंतजार करती है, घर में बूढ़ी मां मुझे प्यार करती है...

Kurukshetra News - स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में गीता निकेतन स्कूल स्थित विद्या भारती भवन में एक शाम शहीदों के नाम कवि सम्मेलन...

Aug 12, 2019, 08:05 AM IST
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स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में गीता निकेतन स्कूल स्थित विद्या भारती भवन में एक शाम शहीदों के नाम कवि सम्मेलन किया गया। हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला और अदबी संगम कुरुक्षेत्र की ओर से हुए इस सम्मेलन की अध्यक्षता अदबी संगम कुरुक्षेत्र की अध्यक्षा डॉ. शकुंतला शर्मा ने की। वहीं मुख्यातिथि हरियाणा साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष राव रणजीत सिंह और विशिष्ट अतिथि डॉ. रामेंद्र सिंह रहे।

सम्मेलन में र|चंद सरदाना द्वारा लिखित पुस्तक लालपुर का लाल सिंह का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन का संचालन डॉ. बलवान सिंह, सूबे सिंह सुजान और ओमप्रकाश राही ने किया। कार्यक्रम में शहीद मनदीप सिंह की विधवा प्रेरणा को अदबी संगम की ओर से सम्मानित किया गया। डॉ. बलवान सिंह ने बॉर्डर पर तैनात सैनिक की ओर से कहा कि किसी माथे की बिंदिया मेरा भी इंतजार करती है, है घर में एक बूढ़ी मां जो मुझसे प्यार करती है। ओमप्रकाश राही ने कहा कि राही कफन तिरंगे वाला चूम-चूमकर गाती मां और अगर एक बेटा होता वतन पर उसे लुटाती मां। र|चंद सरदाना ने कहा कि मैं भारत वर्ष महान हूं, मैं प्यारा हिंदुस्तान हूं, मैं जन-जन की जान हूं। डॉ. ममता सूद ने कहा कि मां तू मुझको यह बतला, मेरे पापा को गोली क्यों मारी, शहीद उन्हें क्यों कहते हैं सब, यह शहीद, शहीद क्या होता है। प्रकाश कश्यप ने कहा कि रात को दिन सुबह को शाम लिख गए, जागकर वो नींद भी हराम लिख गए। हम रहे मशरूफ फेसबुक कमेंट में, वे बहाकर अपना खून सलाम लिख गए। डॉ. जीवन बक्शी ने कहा कि जब संग्राम की ठानी लिख, उसकी अमर कहानी लिख।

आजादी का जश्न मनाएं, करके याद शहीदों को खुशी मनाएं : कस्तूरी लाल शाद ने कहा कि हसरतों की सरजमीं पर आजादी का जश्न मनाएं, करके याद शहीदों को हम झूमें नाचें खुशी मनाएं। मोतीराम तुर्क ने कहा कि कहो फूल को छोड़कर कौन मांगता शूल, है स्वराज के सामने हमें क्या स्वर्ग की धूल। सुधीर ढांढा ने कहा कि जितना उठाना था उठा लिया तूने फायदा हमारी शराफत का, अंदाजा नहीं शायद तुझे पाक हमारी ताकत का। कविता रोहिला ने कहा कि छिन गई जो खुशियां हमसे मैं उन्हें लौटाने आई हूं, मैं भारत की धरा हूं धारा बदलने आई हूं। गंगा मलिक ने कहा कि कब से गिरवी था शीष मुकुट वो अब माथे पर आया है, उसकी रक्षा को वीरों ने जाने कितना लहू बहाया है। गुलशन ग्रोवर ने कहा कि जो सपना था शहीदों का हमें साकार करना है, देश को भुखमरी व भ्रष्टाचार से आजाद करना है। सूबे सिंह सुजान ने कहा कि मकां की नींव में जैसे ये पत्थर काम आते हैं, शहीदों के वतन की नींव में वैसे सर काम आते हैं। वतन की आग सीने में जलाओ, पर संभलना तुम, हमेशा आग और पानी बराबर काम आते हैं। इसके अलावा सीआर मोदगिल, आरके शर्मा, मेहरचंद धीमान, संजय मित्तल, डॉ. संजीव अंजुम, दीदार सिंह कीर्ति, करनैल खेड़ी, डॉ. शकुंतला शर्मा, और डॉ राकेश भास्कर ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।

कवि सम्मेलन में शहीद मनदीप की विधवा प्रेरणा को सम्मानित करते अदबी संगम के सदस्य।

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