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श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश देकर हमें कर्मयोग का ज्ञान सिखाया : पं. कमल

एक वर्ष पहले
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गांव मेघामाजरा में समस्त ग्रामीणों एवं देवी मंदिर कमेटी द्वारा अखिल भारतीय श्री मार्कण्डेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी के सान्निध्य में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ एवं श्री मदभागवत कथा में पांचवें दिन व्यासपीठ से पंडित कमल कुश ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का संगीतमयी शैली में इतने सुंदर वृतांत सुनाए कि श्रद्धालु मस्ती में झूम उठे।

उन्होंने कथा में कहा कि गुरु ही मोक्ष के द्वार खोलते हैं और गुरु के बिना ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है। पंडित कमल कुश ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही कर्म का चयन किया। नन्हे कृष्ण द्वारा जन्म के छठे दिन ही शकटासुर का वध कर दिया, सातवें दिन पूतना को मौत की नींद सुला दिया। तीन महीने के थे तो कान्हा ने व्योमासुर को मार गिराया। भगवान श्री कृष्ण ने बाल्यकाल में ही कालिया वध किया और सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को उठा कर इंद्रदेव के अभिमान को चूर-चूर किया। कथा में बताया कि गोकुल में भगवान श्री कृष्ण ने गोचरण किया तथा कुरुक्षेत्र की धरती पर गीता का उपदेश देकर हमें कर्मयोग का ज्ञान सिखाया। प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। पंडित कमल कुश ने कहा कि मनुष्य जन्म लेकर भी जो व्यक्ति पाप के अधीन होकर इस भागवत रूपी पुण्यदायिनी कथा को श्रवण नहीं करते हैं तो उनका जीवन ही बेकार है और जिन लोगों ने इस कथा को सुनकर अपने जीवन में इसकी शिक्षाएं आत्मसात कर ली हैं तो मानो उन्होंने अपने पिता, माता और प|ी तीनों के ही कुल का उद्धार कर लिया है। भागवत कथा साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन हैं। यह कथा बड़े भाग्य से सुनने को मिलती है इसलिए जब भी समय मिले, कथा में सुनाए गए प्रसंगों को सुनकर अपने जीवन में आत्मसात करें, इससे मन को शांति भी मिलेगी और कल्याण होगा। कलयुग में केवल कृष्ण का नाम ही आधार है जो भवसागर से पार लगाते हैं। परमात्मा को केवल भक्ति और श्रद्धा से पाया जा सकता है। पांचवें दिन की कथा के समापन पर महंत जगन्नाथ पुरी ने श्रद्धालुओं के साथ व्यासपीठ पर भागवत पुराण की आरती की। इस मौके पर दलबीर सिंह, बलजीत सिंह, गुरमीत सिंह, देवी दयाल शर्मा, विजय शर्मा, हुकम चन्द, धर्मवीर, दिनेश, मनीष, विजय, गुरचरण, राम कुमार, शीला देवी, कुसुम देवी, उर्मिला देवी, रजनी, सुखविंदर व अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।

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